लालबर्रा नगर मुख्यालय को सुव्यवस्थित एवं सुन्दर बनाने के लिए प्रशासन के द्वारा शासकीय जमीन पर किये गये अतिक्रमण को तोडऩे की कार्यवाही की जा रही है साथ ही राजस्व विभाग के द्वारा नोटिस जारी कर जिन दुकानदारों को अपना अतिक्रमण हटाने कहा गया है उनके द्वारा स्वयं कमरा खाली किया जा रहा है तो वहीं कुछ दुकानदारों को स्थाई पट्टा उनके पास है तो तहसील कार्यालय में दस्तावेज जमा करने कहा गया है वे दुकानदार तहसील कार्यालय पहुंचकर दुकानों का दस्तावेज जमा कर रहे है साथ ही दस्तावेजों की जांच के बाद अवैध पाये जाने पर बाजार क्षेत्र के शासकीय जमीन पर किये गये अतिक्रमण को प्रशासन के द्वारा तोडऩे की कार्यवाही की जायेगी। १६ जनवरी को लांजी पूर्व विधायक किशोर समरिते लालबर्रा पहुंचकर विश्राम गृह में स्थानीय दुकानदार से मुलाकात की और प्रशासन के द्वारा अतिक्रमण हटाने की जो कार्यवाही की जा रही है उसे प्रशासन की हठधर्मिता व निरंकुशता बताते हुए अतिक्रमण हटाने के पहले दुकानदारों को व्यवस्थित किये जाने की मांग शासन-प्रशासन से की है।
चर्चा में लांजी के पूर्व विधायक किशोर समरिते ने बताया कि जिस तरह से जोशीमठ पर शासन-प्रशासन के द्वारा कार्यवाही की जा रही है उसी तरह से लालबर्रा में प्रशासन के द्वारा लोगों के घर तोड़े जा रहे है उन्हें बेदखल किया जा रहा है जिसकी जानकारी मुझे मिलते ही मै उनसे मिलने के लिये आया हूं साथ ही यह भी बताया कि हमें पता है कि यहां पर यातायात का बहुत दबाव है पर यदि उन्हें फोरलेन बनाना है, बायपास बनाना है तो गांव के अंदर से बनाने का तो कोई औचित्य ही नहीं है क्योंकि रोड कांग्रेस की गाइडलाइन है कि सड़के इस समय सीधी होनी चाहिये और गांव से व घनी आबादी से बाहर होनी चाहिये परन्तु लालबर्रा में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही प्रशासन के द्वारा की जा रही है वह एक तरह से अनुच्छेद २१ का उल्लघंन है और प्रशासन के द्वारा यदि जनपद की, पंचायत की व घास की भूमि से अतिक्रमण हटाया जा रहा है तो अतिक्रमण हटाने से पहले उनकी व्यवस्था की जानी चाहिये क्योंकि यदि छोटे-छोटे दुकानदारों की दुकानें बंद हो जायेगी तो उनके घर में शाम का चुल्हा जलना बंद हो जायेगा एवं जीवन यापन करने में खासा परेशानी होगी जबकि दुकान संचालित कर वे अपने परिवार का पालन-पोषण करते है प्रशासन उनकी दुकाने तोड़कर उनके जीने के अधिकार को खत्म नही कर सकता।
संविधान में रहकर काम करना चाहिए
श्री समरिते ने बताया कि ५०० दुकानदारों को नोटिस जारी किया गया है कि अतिक्रमण हटाये तो पहले उनकी व्यवस्था करना चाहिए ताकि अपनी दुकान लगाकर शाम की व्यवस्था कर सके और लालबर्रा मुख्यालय में प्रशासन निरंकुश होकर काम कर रहा है ऐसा नही करना चाहिए यदि राजनीतिक दबाव में काम हो रहा है तो उसे देखना चाहिए और संविधान के दायरे में रहकर काम करना चाहिए, लोगों का अहित न हो इस बात का ध्यान रखना चाहिए साथ ही यह भी बताया कि यदि प्रशासन अपनी हठधर्मिता में रहे तो उसके खिलाफ जनता को लेकर विरोध करेगें और इस अतिक्रमण की कार्यवाही को रोकने के लिए सीएम, कमिश्नर व कलेक्टर से चर्चा करेगें। श्री समरिते ने बताया कि पांढरवानी-लालबर्रा पुरानी ग्राम पंचायत है और गांव के लोगों को स्टेट हाईवे व नेशनल हाईवे मार्ग से जोडऩे के लिए उन्हे बेदखल किया जा रहा अगर स्टेट व नेशनल हाईवे रोड़ बनाना है तो गांव के बाहर से बनाया जाये अगर लालबर्रा को महानगर बनाना है तो उसकी अधिसूचना जारी करना चाहिए क्योंकि गांव के अंदर से स्टेट व नेशनल हाईवे रोड़ नही बना सकते, रोड़ कांग्रेस की गाईडलाईन का पालन करे शासन, गांव में रहने वाले लोगों को स्टेट व नेशनल हाईवे रोड़ थोप कर गांव-गाली में रहने वाले लोगों को उनके घर से क्यों बेदखल किया जा रहा है, सड़के अतिक्रमण में है और भुगत रहे आमजन ऐसा नही होना चाहिए।
पांढरवानी-लालबर्रा ग्राम पंचायत है
श्री समरिते ने बताया कि वर्तमान में पांढरवानी-लालबर्रा ग्राम पंचायत है, नगर परिषद बनने के लिए अधिसूचना जारी होगी तब यह नगर परिषद बनेगी जिसके बाद बैठक होगी उसके बाद अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की जायेगी साथ ही यह भी बताया कि जब मंडी बोर्ड था गौरीशंकर बिसेन के पास में तब वे गांव की सड़के चौड़ी कर सकते थे, गांव के बाहर से बायपास बना सकते थे परन्तु ऐसा नही किया और बकोड़ा में मंडी का निर्माण किया गया लालबर्रा में क्यों नही किया गया, तब लालबर्रा के बारे में क्यों नही सोचा गया, उस समय मंडी बोर्ड के पास करोड़ों रूपये का बजट था तब उन्होने ऐसा क्यों नही किया और जो अतिक्रमण की कार्यवाही की जा रही है यह प्रशासन की हठधर्मिता है, निरंकुशता है जिसके खिलाफ में जनता को अपनी आवाज उठाने के साथ ही विरोध प्रदर्शन करना चाहिए।










































