पदमेश न्यूज़, बालाघाट।समय बदला ,नियम बदले और साल भी बदल गया, लेकिन नगरपालिका के हालात अब तक नहीं बदले।शायद यही वजह है कि पिछले वर्षो की तरह इस इस वर्ष भी नपा का वित्तीय प्रबंधन लड़खड़ा गया है।प्रतिमाह खर्च की तुलना में पर्याप्त आमदनी न होने के चलते नगर पालिका क्षेत्र के विकास कार्य अटके पड़े हैं वहीं खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। इन सभी अटकलों से निजात पाने के लिए अब नगर पालिका ने नागरिकों पर नया कर(नया टैक्स) लगाने का प्लान तैयार किया है।जो घर घर कचरा उठाने के नाम पर प्रतिमाह वसूला जाएगा।बहरहाल यह टैक्स बालाघाट नगर में लागू हो पाएगा या नहीं, या फिर जनता नए टैक्स का विरोध करने सड़कों पर उतरेगी या नहीं। यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन इस टैक्स के लागू होने से नगरवासियों पर अतिरिक्त भार जरूर पड़ने वाला है।अब देखना यह दिलचस्प रहेगा कि नगरपालिका इस व्यवस्था को कितनी प्रभावी ढंग से लागू कर पाती है और जनता की नाराजगी को कैसे संभालती है।
तरह तरह के टैक्स से ,पहले ही परेशान है नागरिक, अब थोपा जा रहा एक और टैक्स
सम्पत्ति कर, जल कर, सफाई कर,प्रकाश कर, शिक्षा कर,के अलावा ऊपर से उपकर व अन्य बकाया टैक्स पर, आम लोगो को बात बात पर नोटिस थमाने वाली नगरपालिका अब घर घर गाड़ी भेजकर कचरा लेने के नाम पर भी टैक्स वसूल करेगी।जिसकी तैयारी इन दिनों नगर पालिका ने जोरो शोरो से चल रही है।प्राप्त जानकारी के अनुसार गाड़ी भेजकर कचरा लेने के नाम पर अब नगर पालिका प्रत्येक घर से 50 रु तो वही प्रत्येक प्रतिष्ठानों से 100 रु तक का शुल्क प्रतिमाह वसूल करने की तैयारी में है।जिसकी पुष्टि स्वयं मुख्य नगरपालिका अधिकारी द्वारा की गई है।एक जानकारी के अनुसार वर्ष 2026 जनवरी माह से इस टैक्स को वसूल किया जाएगा। आपको बताएं कि बालाघाट के आम नागरिक, नगर पालिका द्वारा लगाए जाने वाले तरह-तरह के टैक्स से, पहले से ही काफी परेशान है। अब नागरिकों पर एक और टैक्स थोपा जा रहा है।मतलब साफ है कि आने वाले समय में सालाना टैक्स जमा करने,जब लोग नगर पालिका पहुंचेंगे तो उन्हें कचरा उठाने के नाम पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। मतलब साफ है कि महंगाई के इस दौर में लोगो को अब अन्य लगने वाले टैक्सो के अलावा कचरा के नाम पर,अतिरिक्त अधिक राशि जमा करनी पड़ेगी।
निःशुल्क सेवा पर लगेगा ब्रेक
शहर में अब तक फुकट में मिलने वाली डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण सेवा पर ब्रेक लग सकता है।क्यो की नगरपालिका ने कचरा उठाने के लिए मासिक शुल्क लागू करने का निर्णय लिया है, जिससे आम नागरिकों की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ेगा। नई व्यवस्था के तहत अब प्रत्येक घर से 50 रुपये प्रतिमाह और व्यापारिक प्रतिष्ठानों से 100 रुपये प्रतिमाह कचरा शुल्क वसूला जाएगा।नगरपालिका अधिकारियों का कहना है कि इस शुल्क वसूली से कचरा प्रबंधन व्यवस्था में सुधार किया जाएगा। नियमित कचरा उठाव, बेहतर सफाई और संसाधनों में वृद्धि का दावा किया जा रहा है।हालांकि इस नए निर्णय को लेकर शहर में विरोध की स्थिति बन सकती है।लेकिन नपा द्वारा इसे पूर्व में बनाए गए नियम के तहत ही वसूले जाने की बात कही जा रही है।
2021 में बनाए गए नियम का दिया जा रहा हवाला
नगरपालिका अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय शासन के वर्ष 2021 के नियमों के तहत लिया गया है, जिसमें शहरी निकायों को कचरा प्रबंधन के लिए उपयोगकर्ता शुल्क लेने का प्रावधान किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, कचरा संग्रहण, परिवहन और निस्तारण में आने वाले खर्च को देखते हुए यह कदम जरूरी हो गया है।जिसे जल्द ही नगरी क्षेत्र में लागू किया जाएगा।
नागरिकों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
महंगाई के दौर में इस नए शुल्क से आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा। पहले जहां लोग बिना किसी शुल्क के कचरा गाड़ी की सुविधा का लाभ ले रहे थे, अब उन्हें हर महीने भुगतान करना होगा।या साल भर के टैक्स में इस टैक्स को भी जोड़ दिया जाएगा।खासतौर पर मध्यम और निम्न वर्ग के परिवारों में इस निर्णय को लेकर असंतोष देखा जा सकता है।
इस टैक्स से व्यापारी भी हो सकते है नाराज
व्यापारिक प्रतिष्ठानों से 100 रुपये प्रतिमाह वसूले जाने के निर्णय से व्यापारियों में भी नाराजगी देखी जा सकती है।क्यो की एक व्यापारी को, घर से कचरा उठाने के 50 रु प्रतिमाह, तो वही दुकान से कचरा उठाने के 100 रु देने होंगे, प्रतिमाह उसे 150 रु का अतिरिक्त टैक्स लगेगा।वही यदि वह सालाना टैक्स जमा करता है तो 150 रु प्रतिमाह के हिसाब से उसे अब तक लगने वाले सालाना टैक्स के अलावा 1800 रु अतिरिक्त सालाना टैक्स भरना पड़ेगा।वही आम नागरिकों को 50 रु महीना के हिसाब से सलाना 600 रु का अतिरिक्त भार पड़ेगा।ज्ञात ही कि चाहे वो आम नागरिक हो,या वो व्यापारी हो,सभी लोग पहले से ही टैक्स और अन्य खर्चों के बोझ से दबे पड़े है, ऐसे में यह नया शुल्क दोनो की परेशानी बढ़ा सकता है।
जहां गाड़ी नहीं पहुंचती, वहां क्या होगा?
सबसे बड़ा सवाल उन इलाकों को लेकर उठ रहा है, जहां अभी तक कचरा गाड़ी नियमित रूप से नहीं पहुंचती। ऐसे क्षेत्रों में जब सेवा ही उपलब्ध नहीं है, तो शुल्क किस बात का लिया जाएगा? इस मुद्दे पर नगरपालिका की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया है।हलाकि उन गलियों में नपा द्वारा रिक्सा गाड़ी, कचरा ठेला भेजकर व्यवस्था बनाने की बात कही जा रही है।
सफाई व्यवस्था बनाम नया कचरा टैक्स
बात अगर बालाघाट नगरी क्षेत्र की करें तो नगर के सभी 33 वार्डो में नागरिकों से अक्सर शिकायत आती है कि उनके इलाको में महीनों से सफाई नहीं हुई है और कचरा वाहन नहीं पहुँच रहे हैं, लेकिन टैक्स वसूला जा रहा है। ऐसे में यदि इस टैक्स को चुपके से लागू कर दिया जाता है या फिर इस टैक्स वसूली के लिए आम जनता को अपने पक्ष में नहीं लिया जाता या उन्हें उचित मार्गदर्शन नहीं दिया जाता, तो संभवत: इस नए टैक्स को लेकर नगर में बवाल खड़ा हो सकता है।
मुख्य बिंदु
फोकट में नही मिलेगी कचरा उठाने की सुविधा
घरों से 50 रुपये प्रतिमाह कचरा शुल्क
प्रतिष्ठानों से 100 रुपये प्रतिमाह होगी वसूली
2021 के नियमों के तहत लागू की जा रही व्यवस्था
सेवा नहीं मिलने वाले क्षेत्रों में असमंजस
नागरिकों और व्यापारियों में बढ़ सकती है नाराजगी
यह कोई नया टैक्स नहीं है, सिर्फ लागू नही किया गया था- कतरोलिया
इस पूरे मामले को लेकर की गई चर्चा के दौरान मुख्य नगर पालिका अधिकारी बीड़ी कतरोलिया ने बताया कि घर-घर से कचरा उठाने की सुविधा नगर पालिका द्वारा दी जा रही है, उसपर टैक्स लगाने का प्लान चल रहा है ,यह कोई नया टैक्स नहीं है बल्कि मध्य प्रदेश शासन द्वारा बनाया गया 2021 का नियम है जिसके तहत इस टैक्स को लागू किया जाना है। इस टैक्स का सर्कुलर जल्द जारी किया जाएगा, प्रत्येक घर से 50 रु तो वही व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से 100 प्रतिमाह का शुल्क वसूला जाएगा। हालांकि नियम 2021 से बना है लेकिन इसे 2026 से लागू करने का प्लान किया जा रहा है। हम कचरा गाड़ी को डोर टू डोर भेजने की व्यवस्था करेंगे, जहां कचरा गाड़ी नहीं जा सकती वहां ट्राला भेजेंगे, क्योंकि यह जो सेवा फ्री में दी जा रही है तो कोई उसका महत्व नहीं समझता,गाड़ी भेजने के बावजूद भी लोग इधर-उधर कचरा फेंक देते हैं जब टैक्स लगने लगेगा तो लोग इसका महत्व समझेंगे और घरों व प्रतिष्ठानों से निकलने वाला कचरा, गाड़ी में ही देंगे।अभी टैक्स लागू नही किया गया है, फिलहाल इस टैक्स को लागू करने का प्लान किया जा रहा है।









































