फिल्म ‘संदीप और पिंकी फरार’ की सफलता को लेकर अर्जुन कपूर खुश हैं। इसकी सफलता का श्रेय, फिल्म से जुड़ी यादें और पिता बोनी कपूर की फिल्म के रीमेक आदि पर उनसे बातचीत हुई, जिसका उन्होंने खुलकर जवाब दिया। प्रस्तुत है दैनिक भास्कर के साथ हुई अर्जुन की बातचीत के प्रमुख अंश –
Q. ‘संदीप और पिंकी फरार’ की सफलता का श्रेय टीम को कितना देना चाहेंगे और खुद कितना लेना चाहेंगे?
A. ‘संदीप और पिंकी फरार’ की खासियत है कि यह वरुण ग्रोवर और दिबाकर बनर्जी के दिमाग से जन्मी कहानी है। उन्हीं की वजह से इस तरह की फिल्म बनी है। फिल्म की सफलता का श्रेय राइटर और डायरेक्टर को ही देना पड़ेगा। जहां तक मेरी परफॉर्मेंस का सवाल है, उसका श्रेय भी दिबाकर सर को देता हूं, क्योंकि उन्हें विश्वास था कि यह मुझसे निकाल सकते हैं। हां, फिल्म करने का श्रेय अपने आपको दूंगा, क्योंकि मैंने ऐसा कैरेक्टर करने का चांस लिया। यह थोड़ी आड़ी फिल्म और आड़ा किरदार था। जिस तरह का अंत था, बेशक उसे लेकर थोड़ा कंफ्यूज था कि वह किस तरह बड़े पर्दे पर उभरकर आएगा। लेकिन मैं चांस इसलिए लेना चाह रहा था, क्योंकि दिबाकर बनर्जी का बहुत बड़ा फैन हूं। खुश हूं कि इसे सफलता प्राप्त हुई। टीम एफर्ट के नाते दिबाकर और वरुण के साथ अपने आपको और परिणीति चोपड़ा को भी श्रेय देना चाहूंगा।
Q. आपके अनुसार, किसी प्रोजेक्ट की सफलता के पीछे वे क्या कारक हैं, जो उसे सफल बनाते हैं?
A. देखिए, किसी भी फिल्म के पीछे रीड़ की हड्डी राइटिंग होती है। स्पेशली, हिंदुस्तानी दर्शकों के लिए इमोशन बहुत जरूरी होता है। फिर उसके अंदर थोड़ी चमक आती है कि सही एक्टर्स को कास्ट करो, जो कहानी को ऑडियंस तक पहुंचा सके। उसके बाद कहीं न कहीं मानता हूं कि रिलीज टाइमिंग, लक, प्रोमोशन, मार्केटिंग… ये सब चीजें पांच-पांच, दस-दस पर्सेंट कंट्रीब्यूट कर जाती हैं। आइ थिंक, कास्टिंग और कहानी, ये दोनों चीजें सबसे ज्यादा जरूरी होती हैं। आखिर में प्रोड्यूसर का जो हाथ होता है, जो इन सारी चीजों को जोड़ पाए। यह कुछ रीजन हैं, जिसे फिल्म की सफलता का कारक कहूंगा।
Q. फिल्म की सफलता और असफलता दोनों का ठीकरा ज्यादातर एक्टर्स के सिर फोड़ा जाता है, इस पर क्या कहेंगे?
A. हम एक्टर्स पोस्टर पर आते हैं, तब हम चेहरे होते हैं, इसलिए हमें सबसे ज्यादा भार उठाकर चलना भी होता है। जब सफलता मिलती है, तब सबसे ज्यादा श्रेय भी हमें जाता है। फैक्ट है कि जब प्यार मिलता है, तब थोड़ा-सा गुस्सा भी मिल सकता है। हां, यह टीम एफर्ट होता है। मैं यह नहीं कहता हूं कि कोई एक्टर जान-बूझकर फिल्म को नहीं चलाता। जब फिल्म चलती या नहीं चलती है, तब बहुत सारे कारण होते हैं और एक्टर उनमें से एक होता है। हां, फिल्म बनाने का जब फैसला करते हैं, तब एक्टर के पास एक पावर जरूर होता है, वह यस या नो कह सकता है। यह हमें मानकर चलना पड़ता है कि इस पावर का इस्तेमाल अच्छी तरीके से करना चाहिए, क्योंकि ऑडियंस बहुत समझदार हो गई है। वह यह नहीं चाहती है कि हम उन्हें कुछ ऐसा दें, जो उनके दिमाग में ऐसा न लगे कि उन्हें काटा जा रहा है। हिट-फ्लॉप का श्रेय हमेशा पहले एक्टर्स को और उसके बाद क्रिएटिव लोगों को मिला है। मैं मानता हूं कि आज एक्टर्स के लिए ज्यादा जरूरी यह है कि वह पूरी शिद्दत के साथ काम करें। भले ही फिल्म थोड़ी असफल हो, लेकिन इज्जत बरकरार रहनी चाहिए। कोशिश अच्छी रहे, वह ज्यादा जरूरी है। एक ऐसी फिल्म करके अपनी इज्जत न गवाएं।
Q. अच्छा, ‘संदीप और पिंकी फरार’ में ऐसा कौन-सा सीन है, जिसे दिल के बेहद करीब पाते हैं?
A. आइ थिंक, मेरा गाना फरार… है। हालांकि, यह सीन नहीं है। जिस तरह से दिबाकर सर ने मुझे मेन स्ट्रीम में पर्जेंट किया है। कमर्शियल हीरो होने के बावजूद उन्होंने मेरे अंदर से रिहर्सल करवाकर कमर्शियल तोड़ा है। मेरे अंदर से कैरेक्टर में जो डांस करना है। उससे पिंकी की फ्रस्ट्रेशन, खुन्नस, पिंकी फेमिनिन साइड, डांस में उसका मग्न हो जाना, पिंकी को कहीं न कहीं डांस से जो एक खुशी आती है, इसे जिस तरह से पर्जेंट किया है, वह मेरे दिल के बहुत करीब है।
Q. इस फिल्म से जुड़ी इंटरेस्टिंग यादें क्या हैं?
A. आइ थिंक, इस फिल्म की सबसे इंटरेस्टिंग चीज यही रही कि जिस तरह से डिक्शन और डायलेक्ट पकड़ा, महिपालपुर इलाके में मुझे दो-तीन सप्ताह रखा गया। वहां दिबाकर, तरुण और डिक्शन कोच वहां साथ रहे। उससे पहले मुंबई में छह सप्ताह दिबाकर सर के साथ बिताया। उनसे रोजाना बातचीत होती और साथ में टाइम बिताते थे। लहजा पकड़ने के लिए कॉमिक बुक, न्यूज पेपर, इंग्लिश बुक्स पढ़ा। आखिर में सीन अलग-अलग तरीके से किया गया। प्री-प्रैप की एक जर्नी रही, उसमें पिंकी की एक बैक स्टोरी बनाई गई। मेरे लिए यह जानना बहुत जरूरी हो गया था कि आखिर पिंकी ऐसा क्यों है? क्योंकि मैं पिंकी तो हूं नहीं और न ही मैं उस कल्चर में पला-बढ़ा हूं। हां, वह कहानी बनाने के बाद पिंकी के कैरेक्टर में घुसा, तब पिंकी मेरे लिए ऑलरेडी एक जीता-जागता इंसान था। मेरे लिए वह कैरेक्टर डेवलपमेंट यादगार चीज रही।
Q. अगर पिताजी की कोई फिल्म रीमेक करना चाहेंगे, तब वह कौन-सी होगी? और क्यों?
A. देखिए, डैड की फिल्म है, तब वही रीमेक करें और वही डिसाइड करें तो बेहतर है। मैं तो उनकी हर फिल्म को लेकर इमोशनल हो जाऊंगा, क्योंकि उन्होंने बहुत बेहतरीन फिल्में बनाई हैं। कुछ फिल्में ऐसी भी होती हैं, जो छुई नहीं जानी चाहिए। मैं उनके साथ फिल्में जरूर करना चाहूंगा, पर मुझे ऐसा लगता है कि अब रीमेक का जमाना पीछे छूट गया है। हमें नया कंटेंट बनाना चाहिए। अगर रीमेक करेंगे भी, तब ऐसे तरीके से करें, जहां पर कुछ अलग हो। एक कहानी जो कहीं न कहीं छूट गई हो, जिसको अपना श्रेय नहीं मिला हो, उसे मिले। अगर वैसी फिल्म का रीमेक बने, तब डेफिनेटली करना चाहूंगा।
Q. एक ‘विलेन-2’ और ‘भूत पुलिस’ की स्थिति क्या है? इसे लेकर लेस्टेस्ट जानकारी और अपने किरदार के बारे में बताएंगे?
A. फिल्म ‘भूत पुलिस’ की शूटिंग खत्म हो चुकी है। हमने नवंबर-दिसंबर के महीने में धर्मशाला में शूटिंग की और जनवरी में मुंबई में खत्म की। इस वक्त फिल्म की एडिटिंग चल रही है। ‘विलेन-2’ की शूटिंग अप्रैल में शुरू की थी, लेकिन पूरे देश भर में लॉकडाउन हो गया। अब स्थिति थोड़ी इम्प्रूव हुई है, तब मुझे लगता है कि हम जुलाई से वापस सेट पर जा पाएंगे। देखते हैं, इस वक्त लोगों की सेफ्टी का ज्यादा ध्यान रखना जरूरी है। जैसे शूटिंग अलाउड होगी, हम अच्छी तरह से प्लान करके प्रोटोकॉल फॉलो करते हुए शूटिंग करने पहुंच जाएंगे। उम्मीद करते हैं कि दर्शकों के लिए बड़े पर्दे पर फिल्म को दर्शा पाएंगे।










































