असफलता से अब डर नहीं लगता : कुलदीप

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चाइनामैन स्पिनर कुलदीप यादव ने कहा है कि खेल से बाहर रहने के दौरान उन्होंने अपनी गेंदबाजी पर विचार किया तब उन्हें समझ आया कि उन्हें तेजी से गेंद फेंकनी चाहिये। कुलदीप ने कहा कि अब वह विफल होने से नहीं डरने। कुलदीप ने भारत की ओर से सात टेस्ट 69 एकदिवसीय और 25 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। उन्होंने कहा कि जब आप विफल होते तो आप सीखते हो। जब मैंने जनवरी में भारतीय टीम में वापसी की तो मैं असफलता से डरा नहीं था, मैं खेल का आनंद लेना चाहता था। मेरा ध्यान अच्छी गेंदबाजी पर लगा था क्योंकि विकेट मिलना मेरे हाथों में नहीं था। मैं सिर्फ अच्छी लाइन एवं लेंथ में गेंदबाजी करना चाहता था। कुलदीप ने कहा कि जब मैं चोटिल हुआ और इसके बाद वापसी करने के लिए मुझे मेरी लय समझना बहुत जरुरी था। मैं थोड़ा धीमा था। सर्जरी के बाद मैंने उस लय में बदलाव किया, मैं अधिक नियंत्रण से गेंदबाजी करने लगा। कुलदीप को पिछले साल सितंबर में इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के दौरान घुटने की चोट लगने के बाद सर्जरी करानी पड़ी। वहीं लंबे रिहैब के बाद उन्हें वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैचों की वनडे श्रृंखला में शामिल किया गया और फरवरी में श्रीलंका के खिलाफ तीन टी-20 मैचों में भी उन्हें चोटिल वाशिंगटन सुंदर की जगह लिया गया।

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