ग्राम पंचायत का आदिवासी वाराटोला आज भी सड़क के लिये जूझ रहा है। हालांकि वाराटोला की पहचान पशुपति नाथ मंदिर से है। जहां वारा पंचायत के लोग सहित नगर के श्रृध्दालु भक्त प्रतिदिन दर्शन क साथ ही पूजा अर्चना करने जाते है। शिवधाम मोहल्ले से लेकर पूर्व सरपंच द्वारा नाले तक तो सड़क बना दी मगर उसके आगे की सड़क के लिये किसी प्रकार की राशी न होने पर जितनी राशी उन्हे प्राप्त हुई थी उसके मुताबिक सीसी रोड़ का निर्माण कर दिया। मगर इस निर्माण से वाराटोला अछूता रह गया। जिसकी वजह से श्रृध्दालु भक्तों को पशुपति नाथ मंदिर आने जाने में कच्ची सड़क का ही उपयोग करना पड़ रहा है। यहां यह बताना लाजमी है की यह जो मार्ग है सीधे बालाघाट जागपुर घाट कायदी होते निकलता है जिसकी वजह से सूखे दिनों में लोग ट्रेफिक से बचने के लिये इसी मार्ग से ज्यादा आवागमन करना पसंद करते है।
बालाघाट पहुॅच मार्ग को जोड़ता है यह मार्ग – सुनिल
पद्मेश को जानकारी देते हुये सुनिल उईके ने बताया कि मार्ग का निर्माण तो पूर्व सरपंची कार्यकाल के दौरान हुआ है। लेकिन यह निर्माण कार्य अधूरा है। ऐसे में वाराटोला वासियों में रोष व्याप्त है। यह आदिवासी टोला है। वही आगे में एक पशुपतिनाथ का मंदिर है जहां पंचायत सहित वारासिवनी नगर के लोग भी दर्शन करने आते है। ऐसे में उन्हे सावन मास के महिने में जहां कीचड़ युक्त मार्ग से आना पड़ता है। ऐसे में पंचायत इस मार्ग का निर्माण कर इसे वारा कायदी मार्ग से जोड़े। क्योंकि यह मार्ग सीधे बालाघाट मार्ग को भी कायदी, आलेझरी, रेंगाटोला होते हुये बालाघाट की वैनगंगा पुलिया से मिलता है।
शिवधाम सहित नगरवासी करते है इस मार्ग का इस्तेमाल – जितेन्द्र
इसी तरह ट्रेक्टर मालिक जितेन्द्र भलावी ने पद्मेश को बताया कि यह मार्ग नगर के वार्ड नं.१,२,३ के अलावा शिवधाम वासी आवागमन के लिये करते है। यह मार्ग सीधे कायदी होते हुये बालाघाट मार्ग को जोड़ता है। ऐसे में अधूरे पड़े इस मार्ग की वजह से लोगों को हल्के से पानी में भी कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। मार्ग पर घुटने घुटने भर कीचड़ रहता है। वही हम ट्रेक्टर के मालिक व चालकों से इसी मार्ग से अपने वाहन निकालना पड़ता है। ऐसे में मार्ग का निर्माण होना काफी जरूरी है। क्योंकि हमारे वाहनों के पार्टस पर भी इसका असर पड़ता है।
नारायण बिसेन ने बताया कि वह इस मार्ग से रोजाना आवागमन करते हैं जिसमें बहुत गड्ढे होने के साथ ही धूल उड़ती है ऐसे में दुर्घटना होने की संभावनाएं बनी रहती है। कई बार दुर्घटना हो भी जाती है जिसके लिए सरपंच को बोला भी गया है पर वर्तमान तक समस्या का निराकरण नहीं हुआ है हमारी मांग है कि इस समस्या का जल्द निराकरण हो।
मंदिर जाने के लिये करते है श्रृध्दालुभक्त उपयोग
गौरतलब है की वारा पंचायत का शिवधाम मोहल्ले में रहने वाले रहवासी व नगर के शिवभक्त प्रतिदिन इस मार्ग का मंदिर जाने के लिये उपयोग करते है। बरसात या अन्य मौसम में हो रही बारिश के दौरान उन्हे वारासिवनी बालाघाट मार्ग होते हुये जाना पड़ता है। जिससे उन्हे घेरा पड़ता है। ऐसे में इस आधे अधूरे पड़े मार्ग का निर्माण करना पंचायत को अति आवश्यक है।
आगामी समय में पड़ रही महाशिवरात्री
गौर करने वाली बात है की आगामी समय में महाशिवरात्री पर्व आने वाला है। ऐसे में पशुपतिनाथ मंदिर में मेले का आयोजन होगा। जिसमे नगर सहित क्षेत्र के श्रृध्दालु भक्तों का काफी जमावड़ा रहेगा ऐसे में उन्हे आधू अधूरे कच्चे मार्ग से ही होकर भगवान शंकर के दर्शन करने जाना पड़ेगा।
इनका कहना है –
इस मामले में पद्मेश को जानकारी देते हुये ग्राम सरपंच सूर्यभान सिंह पुसाम ने दूरभाष पर बताया की हमें भी इस मार्ग की चिंता है। हमारे द्वारा २ सौ मीटर का प्रस्ताव टीएस के लिये भेजा गया है। पंचायत के पास इतनी लंबी सड़क के लिये कोई बड़ी राशि नही होती। जितनी भी सड़क बचेगी उसे जनप्रतिनिधियों के सहयोग से बनाया जायेगा।









































