बालाघाट(पदमेश न्यूज़)
भीषण गर्मी के इस दौर में चारो ओर पानी के लिए मचे हाहाकार के बीच कलेक्टर मृणाल मीना ने जिले को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है।लेकिन जिलेवासियो द्वारा पेय जल आपूर्ती ले साथ साथ उनकी फसलों के लिए भी भरपूर पानी की मांग की जा रही है।बालाघाट जिले में पानी की सबसे अधिक समस्या पठार क्षेत्र मे देखी जा रही है जहां पिछले कुछ महीनों से जलसंकट लगातार गहराता जा रहा है,जो किसानों के लिये चिंता का सबब बना हुआ है।जिससे निजात पाने के लिए मप्र और महाराष्ट्र सीमा के दोनों ओर बसे कई गावो के ग्रामीणों ने बावनथड़ी नदी मे ‘राजीव सागर बांध’ का पानी छोड़ने की मांग की है।जहा अपनी इसी मांग को लेकर दोनों राज्यों के लोगो द्वारा द्वारा बालाघाट और भंडारा कलेक्टर को ज्ञापन देकर नदी में बांध का पानी छोड़े जाने की गुहार लगाई जा रही है।जहां आवेदन निवेदन पर भी नदी में पानी छोडे जाने वाली उनकी यह मांग पूरी नही हो रही है।जिसपर अपना आक्रोश जताते हुए स्थानीय ग्रामीणों व किसानों द्वारा अब आंदोलन की रणनीति बनाई गई है।जिन्होंने पठार संघर्ष समिति के बैनर तले 4 मई को बोनकट्टा बैरियर चौक पर दोनों राज्यों के स्थानीय ग्रामीणो किसानों को लेकर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किए जाने की चेतावनी है।
सूखी फसल काटने पर मजबूर हुए किसान
बताया जा रहा है कि पठार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी गांवो में जल संकट गहरा गया है। जहां नदी में पानी नहीं है तो वहीं दूसरी ओर कुए तालाब बोरवेल सुख रहे हैं। वही खेती में सिंचाई के लिए भी पानी नहीं मिल पा रहा है। जिससे किसानों की रबी फसल सूख चुकी है। वही पानी मिलाने की उम्मीद नजर ना आने पर अब किसान सिचाई के अभाव में सुख चुकी फसलों को काटकर मवेशियों को खिलाने के लिए मजबूर हैं और लगातार किसान अपने खेतों में पहुंचकर सुखी फसलों को काट रहे हैं।जिसके चलते स्थानीय किसानों में शासन प्रशासन के खिलाफ लगातार आक्रोश पनप रहा है।
दोनों राज्यों के स्थानीय लोगो की जीवनदायिनी है बावनथड़ी नदी
बताया जा रहा है कि पठार क्षेत्र की जीवनदायिनी बावनथड़ी नदी पर मध्यप्रदेश एंव महाराष्ट्र राज्य द्वारा सामुहिक रुप से बांध का निर्माण किया गया था,जिस महत्वाकांक्षी परियोजना से वर्ष 2012 से दोनों राज्यों की लाखों हेक्टर भूमी की सिंचाई नहरों के माध्यम से की जाती है,लेकीन बावनथड़ी नदी पर उपरी भाग मे बांध का निर्माण होने से निचले भाग मे नदी की प्रवाहित जलधारा दिसंबर माह मे ही सूख जाती है,जिसके कारण भिषण गर्मी मे बावनथड़ी नदी समीप स्थित समस्त जलस्त्रोंतों का जलस्तर काफी गहराई मे चला जाता है,जिससें नदी किनारे पर बसें दोनों राज्यों के तकरिबन आधा सैकड़ा गावों मे इसका प्रभाव देखने को मिलता है!
किसानों में पनप रहा आक्रोश
बावनथड़ी नदी के दोनों छोर पर हजारों हेक्टर मे किसान रबी फसल धान के अलावा गन्ना एंव सब्जी-भाजी की फसल उगाते है,जिसकी निरंतर सिंचाई करना बेहद जरुरी है।लेकिन विगत 2-3 माह से नदी सूखी पड़ी है। नदी किनारे बसे गावो में जलस्तर लगातार गिर रहा है।चारो तरफ पानी के लिए हाहाकार मची हुई हैं।नदी किनारे बसे गावो के समस्त जलस्त्रोंतों का स्तर बढ़ाने के लिए ‘राजीव सागर बांध’ का पानी बावनथड़ी नदी मे छोड़ना अनिवार्य हो गया है।बावनथड़ी नदी मे ‘राजीव सागर बांध’ का पानी छोड़ने की मांग प्रतिवर्ष की तरहा इस वर्ष भी विगत 1माह पुर्व से चल रही है।जिसपर संबंधित विभाग व दोनों राज्यों के सम्बंधित कलेक्टर ने ध्यान नही दिया, वही पानी ना मिलने पर दोनों सीमावर्ती क्षेत्रों के किसानों की फसल मरने की कगार पर है जिसको लेकर दोनों क्षेत्र के किसानो में आक्रोश पनप रहा है।
गर्मी में हर साल नदी में छोड़ा जाता है पानी
बताया गया कि ऐसा पहली बार नही हुआ है कि बावनथड़ी नदी दिसम्बर में ही सूख गई है,और पठार क्षेत्र में जल संकट गहरा गया हो। बल्कि नदी पर बाध बनाने के बाद से प्रतिवर्ष नदी सूख जाती है।जहा प्रतिवर्ष अप्रैल माह के अंत मे आम जनता, किसानों और ‘पठार संघर्ष समिति’ की मांग के आधार पर ‘राजीव सागर बांध’ का पानी पठार क्षेत्र की जीवनदायिनी बावनथड़ी नदी मे छोड़ा जाता है।जहा परम्परा पिछले कई वर्षों से चली आ रही है जो अब भी कायम है।इसी परम्परा को बरकार रखने की मांग ग्रामीणों द्वारा की गई है। बताया जा रहा है कि नदी किनारे बसे इन गांवों में जैसे-जैसे गर्मी का मौसम आता है वैसे जलस्तर काफी निचे चला जाता है,जिसके परिणामस्वरुप बावनथड़ी नदी के किनारों हजारों की संख्या मे जलस्त्रोंत (कुआं, बोरवेल) पुर्णतः सूख जाते है,जिससें किसानों को खेतों मे सिंचाई की समस्या उत्पन्न होने लगती है एंव नदी किनारों से ग्रामीण क्षेत्रों मे संचालित नल-जल योजनाएं पुर्णतः प्रभावित हो जाती है!
बालाघाट और भंडारा जिले के कलेक्टर ने नही लिया निर्णय
बताया जा रहा है कि नदी मे पानी छोड़ने का निर्णय सामुहिक रुप से बालाघाट जिला और भण्डारा जिला कलेक्टर की आपसी सहमति व विचार विमर्ष से होता है,जिसके पश्चात जिला कलेक्टर ‘राजीव सागर परियोजना’ के उच्चाधिकारियों को वार्तालाप कर बावनथड़ी नदी मे पानी छोड़ने का निर्णय लेते है। यहां कई वर्षो से ऐसा ही होता आ रहा है।हर बार की तरह इस बार भी ग्रामीणों ने ‘राजीव सागर बांध’ का पानी शिघ्रतिशिघ्र बावनथड़ी नदी मे छोड़ने की मांग की वही ‘पठार संघर्ष समिति’ द्वारा दो बार 02 अप्रैल और 17 अप्रैल को ज्ञापन देकर शासन-प्रशासन को इस समस्या से अवगत करा दिया गया है।बावजूद इसके भी मांग पूरी ना होने पर उन्होंने आगामी 4 मई से बोनकट्टा बैरियर चौक अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किए जाने की चेतावनी दी है।
तो 4 मई से अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर देंगे- दीपक
मामले को लेकर दूरभाष पर की गई चर्चा के दौरान पठार संघर्ष समिति संयोजक दीपक पुष्पतोड़े ने बताया कि बावनथड़ी नदी महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश के बालाघाट पठार क्षेत्र से के बीचों-बीच बहती है जिसमें पानी नहीं है। वर्तमान समय में नदी किनारे बसे गांव में जल स्रोत सूख गए हैं और जो कुछ बचे है वह भी सूखने की कगार पर है।किसानों को रबी में धान गन्ने की फसल व अन्य फसलों की सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा है। क्षेत्र के किसानों की फैसले सूख रही है। जिसके चलते दोनों राज्यों के नदी किनारे गावो के ग्रामीण परेशान हो रहे हैं। कई बार जिला कलेक्टर महोदय को अवगत कराया गया है वही 2 अप्रैल और 17 अप्रैल को ज्ञापन सौंपकर नदी में पानी छोड़ने की मांग की गई है। इसी तरह भंडारा कलेक्टर को भी ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराते हुए बावनथड़ी नदी में राजीव सागर बांध का पानी छोड़ने की गुहार लगाई गई है लेकिन दोनों तरफ से इस मामले में कोई सकारात्मक पहल नजर नहीं आ रही है। इसीलिए बावनथड़ी नदी किनारे बसे समस्त गांव के ग्रामीणों ने यह फैसला किया है कि यदि एक सप्ताह के भीतर नदी में पानी छोड़ा नहीं जाता तो फिर दोनों राज्यों के नदी किनारे गावो के हजारों ग्रामीणों को साथ लेकर 4 मई से बोनकट्टा बैरियर चौक पर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन चक्का जाम किया जाएगा। जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।










































