कर्नाटक और मध्य प्रदेश में सूचना अधिकार के तहत जनहित से जुड़ी जानकारियों को देने में जानबूझकर अधिकारियों द्वारा टालमटोल की जाती है।
सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए काम करने वाली संस्था सतर्क नागरिक संगठन की रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। मध्यप्रदेश में सूचना अधिकार कानून के तहत जानकारी नहीं दिए जाने की 9005 शिकायतें और अपीलों का निराकरण किया गया है। इसी अवधि में 8413 नई सेकंड अपील भी दायर हुए हैं। राज्य सूचना आयोग के पास अभी 5929 अपील लंबित है।
मध्यप्रदेश में सूचना अधिकार कानून के तहत जानकारी नहीं देने पर मध्य प्रदेश के 222 अधिकारियों पर 47.50 लाख का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माने की यह राशि 1 जुलाई 2021 से 30 जून 2022 के बीच की है।
कर्नाटक के भी लगभग यही हाल है। कर्नाटक के बाद सबसे ज्यादा जुर्माना मध्यप्रदेश में वसूल किया गया है। मध्यप्रदेश और कर्नाटक में आसानी से सूचना अधिकार कानून के तहत जानकारी आम लोगों को नहीं मिल पाती है। जिसके लिए लोगों को अपील करनी पड़ती है।










































