दुनिया भर में तेजी से विलुप्त हो रही वनस्पतियों और वन्य जीव जंतुओं के संरक्षण, उनके संवर्धन और उनकी सुरक्षा करने की प्रमुख उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए प्रतिवर्ष देश सहित पूरी दुनिया में 3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस मनाया जाता है।
जहां वन्य जीवों और वनस्पतियों के संरक्षण संवर्धन व सुरक्षा के लिए विभिन्न कार्यक्रमों आयोजनों के माध्यम से लोगों में लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जाता है। ताकि वन्य जीव और वनस्पतियों को बचाकर पर्यावरण को संतुलित किया जा सके।
लेकिन हैरत की बात तो यह है कि जिला मुख्यालय में इस विशेष दिन पर कोई भी कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया। या कहें कि इस विशेष दिन को संबधित विभाग ने महज कागजों में मना कर पूरा कर लिया। जिस का एक नजारा गुरुवार को नगर मुख्यालय वन विभाग के विभिन्न कार्यालयो में देखने को मिला।
बात अगर बालाघाट जिले कि करे तो बालाघाट जिला वन्य सम्पदा, खनिज औऱ वन्य जीव जंतुओं से भरा है।जहां हाल ही में एकत्र किए गए आंकड़ों के मुताबिक 89 प्रतिशत बाघ और 100 प्रतिशत तेंदुए की मौजूदगी होने के साक्ष्य मिले हैं।
लेकिन हैरत की बात तो यह है कि जिले में बालाघाट के नाम से एक भी वन्य प्राणी संरक्षित क्षेत्र नहीं है।हालांकि जिले में 4 सेंचुरी क्षेत्र पूर्व से प्रस्तावित है। जिसमे लालबर्रा का सोनेवानी, परसवाड़ा क्षेत्र का जलगांव, लैगुर,और लांजी-सलेटेकरी के बीच का एरिया एरिया शामिल है। लेकिन आज तक इन क्षेत्रों को अभ्यारण क्षेत्र घोषित नहीं किया गया है। जिसके चलते जंगलों की अंधाधुंध कटाई का कार्य आज भी जारी है।










































