Oil and Gas Production: ईरान-इजरायल और अमेरिका के साथ टकराव में जिस चीज की सबसे ज्यादा चर्चा हुई वह थी प्राकृतिक गैस और कच्चा तेल। भले ही अस्थायी युद्धविराम हुआ है बावजूद इसके तकरीबन पूरी दुनिया इन दोनों के संकट का अभी भी सामना कर रही है। ऐसे में यह समझना बहुत जरूरी है कि आखिर खाड़ी देशों में ही गैस और कच्चा तेल ज्यादातर क्यों मिलता है। इसके अलावा, पहले गैस मिलती है फिर तेल या फिर दोनों एक साथ। और धरती के नीचे तेल और प्राकृतिक गैस आखिर बनती कैसे है। आज हम आपको इन्हीं सवालों के जवाब देंगे…आइए आसान भाषा में समझते हैं इस जटिल वैज्ञानिक प्रक्रिया को…
बता दें कि तेल और प्राकृतिक गैस का एक साथ मिलना कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि इसके पीछे भूगर्भीय विज्ञान का मजबूत आधार है। जमीन के नीचे मौजूद तापमान, दबाव और समय का लंबा खेल इन दोनों संसाधनों को साथ पैदा करता है और एक ही जगह पर जमा भी करता है। दरअसल,आज जो कच्चा तेल हमें मिलता है,उसकी शुरुआत समुद्रों में रहने वाले सूक्ष्म जीवों, शैवाल और पौधों से हुई थी। ये जीव मरने के बाद समुद्र की तलहटी में जमा हो गए और समय के साथ मिट्टी और रेत की परतों के नीचे दबते चले गए। ऑक्सीजन की कमी और बढ़ते दबाव ने इन्हें सड़ने की बजाय संरक्षित रखा और बाद में यही जैविक पदार्थ आगे चलकर हाइड्रोकार्बन में बदल गए।
जैसे-जैसे ये परतें गहराई में जाती हैं, तो वहां तापमान और दबाव दोनों मिलकर उस जैविक पदार्थ को धीरे-धीरे कच्चे तेल में बदल देते हैं। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में लाखों साल लगते हैं।
‘ऑयल विंडो’ क्या होती है?
हालांकि हाइड्रोकॉर्बन के तेल बनने के लिए एक खास तापमान की जरूरत होती है,जिसे ऑयल विंडो कहा जाता है। लगभग 60°C से 120°C तापमान तेल बनने के लिए आदर्श पैमाना माना जाता है। इस रेंज में जैविक पदार्थ तरल हाइड्रोकार्बन (कच्चा तेल)में बदलता है वहीं अगर तापमान इस सीमा से कम हो,तो यह प्रक्रिया अधूरी रह जाती है।
तेल गैस में कैसे परिवर्तित होता है?
गैस बनने की प्रक्रिया तेल बनने के बाद और तापमान बढ़ने पर शुरू होती है। जैसे ही तापमान 120°C बढ़ता है तो तेल के भारी अणु टूटने लगते हैं और वे हल्के हाइड्रोकार्बन में बदल जाते हैं। इसी परिवर्तन को थर्मल क्रैकिंग कहा जाता है,इस प्रक्रिया के बाद ही प्राकृतिक गैस बनती है।
जमीन के नीचे कैसे जमा होते हैं तेल और गैस?
जमीन के भीतर बनने वाली यह गैस तेल की तुलना में हल्की होती है, इसलिए यह ऊपर की ओर उठती है। वहीं, तेल उससे नीचे की परत में जमा होता है। इन दोनों के नीचे अक्सर पानी की परत भी मौजूद रहती है। इस तरह प्राकृतिक रूप से गैस, तेल और पानी की तीन परतें बन जाती हैं। इसके अलावा, धरती के अंदर मौजूद चट्टानों की कुछ विशेष परतें,जिन्हें रिजर्वायर और कैप रॉक कहा जाता है,इन संसाधनों को बाहर निकलने से रोकती हैं। यही वजह है कि गैस ऊपर, तेल बीच में और पानी सबसे नीचे फंसा रहता है।
ड्रिलिंग के समय दोनों साथ क्यों निकलते हैं?
जब कंपनियां जमीन में ड्रिलिंग करती हैं, तो वे उसी रिजर्वायर तक पहुंचती हैं जहां गैस पहले से ऊपर मौजूद होती है। तेल उसके ठीक नीचे जमा होता है इसलिए जैसे ही ड्रिलिंग शुरू होती है,दोनों संसाधन लगभग एक साथ बाहर आते हैं।
अब सवाल उठता है कि कि ये कैसे पता चलेगा कि किस इलाके में तेल मिलेगा या गैस तो इसका जवाब है कि तापमान। यह पूरी तरह वहां के तापमान इतिहास पर निर्भर करता है। यही कारण है कि कुछ जगहें ‘ऑयल फील्ड’ होती हैं, जबकि कुछ ‘गैस फील्ड’। वहीं, कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस दोनों ही गैर-नवीकरणीय संसाधन हैं। इन्हें बनने में लाखों साल लगते हैं, लेकिन पिछले कुछ दशकों से इनका दोहन बड़ी तेजी से हो रहा है।








































