गुजरे जमाने की बात ना हो जाए टेलीफोन ?

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दूर बैठे अपने परिचितों से वार्तालाप और प्रत्यक्ष होने का एहसास कराने वाला सबसे पहला आधुनिक साधन टेलीफोन कुछ शासन की बेरुखी और कुछ मोबाइल टेक्नोलॉजी की वजह से अब गुजरे जमाने की बात होने लगा है। तभी तो बीते वर्षों तक हजारों की संख्या में घरों में बजने वाली टेलीफोन की घंटी आज सैकड़ों में सिमट कर रह गई है।

बालाघाट जिले के भीतर टेलीफोन यदि चर्चा की जाए तो बीएसएनएल द्वारा जिले के भीतर हर घर हर गांव तक टेलीफोन पहुंचाने के उद्देश्य से 45 एक्सचेंज कार्यालय स्थापित किए गए थे। लेकिन समय की मार और मोबाइल टेक्नोलॉजी और शासन की बेरुखी की वजह से बीएसएनएल द्वारा बी के वर्षों में 11 एक्सचेंज बंद कर दिए गए वर्तमान में 36 एक्सचेंज संचालित हो रहे हैं । लेकिन इनमें भी कर्मचारियों की कमी बहुत अधिक बनी हुई है या कहें कि कम होते टेलीफोन कनेक्शन की वजह से नई भर्ती नहीं की गई है। बीते वर्षों तक 2 सैकड़ा कर्मचारियों वाला बीएसएनएल अब महज 37 कर्मचारियों के भरोसे अपने ढाई हजार कनेक्शन संचालित कर रहा है। जिला मुख्यालय में इंटरनेट चलाने वालों द्वारा बीएसएनएल के कनेक्शन लिए गए हैं और उन्हें सुचारू रूप से चलाया जा रहा है इस दौरान बीएसएनएल कि सबसे कम कनेक्शन लांजी तहसील में है।

बीएसएनएल में कार्यरत अधिकारी बताते हैं कि शासन द्वारा 4G स्पेक्ट्रम की सुविधा नहीं मिलने की वजह से बीएसएनएल लगातार बिछड़ता गया इसमें शासन की बेरुखी है कि निजी कंपनियों को उसने आगे आने का मौका दिया और बीएसएनएल को पीछे कर दिया।

वहीं दूसरी और बीते 2 वर्ष पूर्व शासन द्वारा बीएसएनएल कर्मचारियों को स्वेच्छा सेवानिवृत्ति दे दी गई। जिस कारण बीएसएनएल में कर्मचारी अधिकारियों की और अधिक कमी हो गई।

बीएसएनएल के कर्मचारी अधिकारी शासन से यही उम्मीद लगा रहे हैं कि जल्द से जल्द निजी कंपनियों की तरह बीएसएनएल को भी 4G स्पेक्ट्रम या फिर 5G स्पेक्ट्रम की सौगात मिले जिससे वर्तमान समय में बीएसएनएल की स्थिति में सुधार हो सके।

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