पद्मेश न्यूज। लालबर्रा। नगर मुख्यालय से लगभग १२ किमी दूर स्थित ग्राम पंचायत कामथी के अंतर्गत आने वाले गोंडीटोला में उस समय तनाव की स्थिति निर्मित हो गई। जब एक निजी खेत मालिक ने आदिवासी समुदाय के प्राचीन पूजा स्थल बड़ा देव की मूर्ति को अपनी जमीन में स्थित होने पर जेसीबी मशीन से खण्डित कर ढहा दिया गया है। जिससे आदिवासी समाज के लोगों में आक्रोश व्याप्त है। वहीं आदिवासी समाज के लोगों का कहना है कि पुरातन समय से इस स्थान पर बड़ा देव की मूर्ति स्थित है और हम लोग पूजा अर्चना करते है जो आस्था का केन्द्र बन गया है। लेकिन खेत मालिक अमितकुमार देशमुख के द्वारा जिस स्थान पर बड़ा देव की मूर्ति स्थापित थी। उसे निजि जमीन है कहकर बेच दिया गया है उसके बाद रविवार को उक्त स्थान से मूर्ति को जेसीबी मशीन से हटा दिया गया है जो गलत है। अगर उनकी जमीन पर बड़ा देव की मूर्ति था तो उन्हे आदिवासी समाज के लोगों को पूर्व में अवगत करवा देना था, हम लोग उन्हे अन्य स्थान पर विराजित कर देते। लेकिन उनके द्वारा बिना जानकारी दिये हमारे बड़ा देव की मूर्ति को जेसीबी मशीन से खण्डित कर ढहा दिया गया है। जिससे हमारी धार्मिक आस्था को आहत पहुंची है जिससे आदिवासी समाज के लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। वहीं पूजा स्थल से मूर्ति को हटा देने की जानकारी जब आदिवासी समाज के लोगों को लगी तो बड़ी संख्या में ग्रामीणजन पहुंचे। जिन्हे देखकर वे लोग भाग गये। प्रशासन से मांग है कि जिनके द्वारा बड़ा देव की मूर्ति को खण्डित किया गया है उन पर कार्यवाही एवं पुन: देवस्थल की स्थापना की व्यवस्था करें उक्त मांगे पूरी नही होने पर उग्र आंदोलन किया जायेगा। जिसकी जवाबदारी शासन-प्रशासन की होगी।
बिना सूचना के कार्यवाही से आदिवासी समाज की आस्था हुई आहत
प्राप्त जानकारी के अनुसार कामथी के अंतर्गत आने वाले गोंडीटोला स्थित भूमि-स्वामी अमितकुमार देशमुख के खेत में आदिवासी समुदाय का पूजा स्थल (देवठाना) स्थापित था। जहां वर्षों से समाज के लोग अपनी धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते आ रहे थे और आदिवासी समाज के लोगों को यह भी जानकारी नही था कि जिस स्थान पर आदिवासी समाज का पूजा स्थल (बड़ा देव) है वह किसी के खेत में है। वे यही समझ रहे थे कि यह आदिवासी समाज का ही होगा और अपनी आस्था के साथ उक्त स्थान पर पूजा अर्चना करते थे। बाद में उन्हे पता चला कि यह किसी की निजि भूमि है लेकिन आदिवासी समाज का आरोप है कि अब किसी की निजि भूमि पर आदिवासी समाज का देवस्थल था तो पहले भूमि – स्वामी द्वारा आदिवासी समाज को सूचना देना था कि आप लोगों का देवस्थल हमारी भूमि पर है उसे अलग कर ले। लेकिन उनके द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना या समाज को विश्वास में लिये रविवार को जेसीबी चलाकर पूजा स्थल को क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। जिससे आदिवासी समाज के लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। वहीं आदिवासी समाज के लोगों का कहना है कि हमारी आस्था पर सीधा प्रहार किया गया है। यदि हमें पहले से सूचित किया जाता, तो हम सम्मानपूर्वक अपने देवों को अन्यंत्र स्थापित कर लेते। लेकिन जिस तरह से हमारे आराध्य स्थल को तोड़ा गया है, उससे हमारी धार्मिक भावनाएं बुरी तरह आहत हुई हैं। साथ ही यह भी कहा कि यह केवल एक निर्माण का टूटना नहीं, बल्कि उनकी संस्कृति और परंपराओं का अपमान है। प्रशासन से मांग है कि क्षतिग्रस्त पूजा स्थल को उसी स्थान पर सम्मान के साथ पुन: स्थापित किये जाये। जल्द ही पूजा स्थल की पुनस्र्थापना के लिए ठोस कदम नहीं उठाये गये तो समस्त आदिवासी समाज एकजुट होकर जिला स्तर पर उग्र प्रदर्शन और आंदोलन करने के लिए बाध्य होगें।
दूरभाष पर चर्चा में अमितकुमार देशमुख ने बताया कि मेरी पैतृक भूमि गोंडीटोला कामथी में है और उक्त स्थान पर आदिवासी समाज के लोग झंडे लगाकर रखे थे एवं पत्थर था, जिसे वे लोग अपना भगवान मानते है, मेरे द्वारा आदिवासी समाज के लोगों को डेढ़ माह पूर्व एवं आज सुबह सूचना दी गई थी कि मूर्ति एवं झंडे को हटा ले किन्तु वे नही आये। जिसके बाद मेरे द्वारा झंडे एवं मूर्ति को सुरक्षित आदिवासी समाज के एक किसान के खेत में रख दिया गया है। श्री देशमुख ने बताया कि जेसीबी मशीन से मूर्ति को खंडित करने एवं सूचना नही देने का जो आरोप लगा रहे है सभी आरोप निराधार एवं बेबुनियाद है।










































