जबलपुर हाईकोर्ट ने अंतर धार्मिक विवाह करने वाले जोड़े को साथ रहने की दी इजाजत

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हाई कोर्ट ने अंतर-धार्मिक विवाह करने वाले जोड़े को एक साथ रहने की अनुमति दे दी।न्यायमूर्ति नंदिता दुबे की एकलपीठ ने पुलिस को दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के दिशा-निर्देश भी दिए हैं।

हाई कोर्ट ने जबलपुर के गोरखपुर क्षेत्र निवासी 27 वर्षीय गुलजार खान द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के बाद उक्त व्यवस्था दी। याचिकाकर्ता के अनुसार उसने अपनी पड़ोसी आरती साहू के साथ घर से भागकर 28 दिसंबर, 2021 को मुंबई के बांद्रा में कोर्ट मैरिज कर ली थी। याचिका में कहा गया कि आरती साहू ने भी अपनी मर्जी से इस्लाम कबूल किया।27 वर्षीय पेशे से मैकेनिक खान ने 18 जनवरी को हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसने याचिका में कहा कि जबलपुर की गोरखपुर थाना पुलिस उसे व उसकी पत्नी को जबलपुर ले आई। थाने लाकर मारपीट करने के बाद पुलिस ने उसकी पत्नी को माता-पिता के हवाले कर दिया व उसे छोड़ दिया। अब उसकी पत्नी को उससे मिलने तक नहीं दिया जा रहा है !

हाई कोर्ट के निर्देश पर 19 वर्षीय आरती साहू को पेश किया गया। उसने गवाही दी कि उसने अपनी मर्जी से इस्लाम धर्म अपनाकर खान से शादी कर ली है। बहस के दौरान शासकीय अधिवक्ता मतांतरण विरोधी कानून का हवाला देकर शादी का विरोध किया। दलील दी कि कानून कहता है कोई भी व्यक्ति शादी के उद्देश्य से मतांतरण नहीं कर सकता है। लिहाजा, आरती को नारी निकेतन भेजने के निर्देश जारी किए जाएं। हाई कोर्ट ने पूरा मामला समझने के बाद आरती को नारी निकेतन भेजने की मांग निरस्त कर दी। हाई कोर्ट ने कहा कि आरती ने अपने बयान में साफ कर दिया है कि उसने याचिकाकर्ता से शादी की थी और वह उसके साथ रहना चाहती है। उसकी उम्र किसी भी पक्ष द्वारा विवादित नहीं है। हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता खान व आरती को साथ-साथ रहने की अनुमति दे दी। सरकारी वकील और पुलिस को नवविवाहित दंपति की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया।

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