जमीनी विवाद में एक युवक के साथ उन्हीं के गांव के कुछ लोगों ने मारपीट कर दी। युवक को घायल अवस्था में परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां उपचार के दौरान युवक की मौत हो गई। घटना के बाद से ही गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के मुताबिक ग्राम झंझाड़पुर में कमल सिंह रात को 2 बजे खेत में पानी फेर रहे थे। तब ही गांव के ही चार लोगों ने जमीन के विवाद को लेकर खेत पर जाकर उनके साथ लठ, फर्शी, से मारपीट कर दी।
पुलिस का कहना है कि देवी सिंह, नाहर सिंह, नारायण सिंह और कल्लू द्वारा मारपीट की गई है। मारपीट के चलते वह बुरी तरह से घायल हो गए थे। जिन्हें घायल अवस्था में परिजन सुबह के समय जिला अस्पताल राजगढ़ लेकर पहुंचे। जहां उपचार के दौरान कमलसिंह की मौत हो गई। उधर मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर भी उपचार नहीं करने व लापरवाही बरतने के आरोप लगाए हैं। घटना के बाद पीएम के पश्चात शव परिजनों को सौंप दिया।
पहले भी हुआ था विवाद
परिजनों का आरोप है कि मृतक का करीब 10-12 बीघा का एक खेत है। जिस पर आरोपित पक्ष के द्वारा कब्जा कर रखा है। आरोपित पक्ष ने गेहूं की फसल की बोवनी कर दी, जबकि इसके पहले मक्का की फसल के समय भी दोनों पक्षों के बीच में विवाद हुआ था। आरोपित पक्ष का कहना है कि खेत हमारा है। इसी बात को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। आरोपितों को यह पता था कि इनके परिवार में काम करने व देखरेख करने वाला कमल सिंह ही है, इसलिए मौका देखकर उसके साथ मारपीट करते हुए मौत के घाट उतार दिया।
रात को किया हमला
परिवार के सदस्य राधेश्याम ने बताया कि मृतक व मेरे चाचा का लड़का रात को खेत में पानी देने के लिए साथ-साथ गए थे। चाचा का लड़का दूसरे स्थान पर था और यह अलग स्थान पर। तब ही रात को चार लोगो ने मौके पर पहुंचकर जमकर मारपीट कर दी। जब यह जानकारी जगदीश को लगी तो वह भी उन तक गया। उसके साथ भी मारपीट की तो वह भागकर गांव चला गया व परिवार के सदस्यों को बताया। ऐसे में रात में महिलाएं खेत पर पहुंची थी। सुबह हमने जाकर देखा व फिर अस्पताल लेकर आए।
अस्पताल में कोई सुनवाई नहीं
राधेश्याम ने बताया कि जब अस्पताल लेकर पहुंचे तो यहां सुनने व देखने वाला कोई नहीं था। एक नर्स थी। हमने उनसे इलाज करने का कहा, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया। बोली की डाक्टर आएंगे तब इलाज शुरू होगा। मृतक पूरे समय बोल रहा था कि मुझे घबराहट हो रही है। मेरे इंजेक्शन लगा दो, बाटल चढ़ा दो, लेकिन कोई सुनवाई नहीं की। इंजेक्शन-बाटल की बोलते -बोलते ही उसकी मौत हो गई। नर्स भी तब बाटल लेकर आई जब उनकी मौत हो गई थी।
नहीं पहुंची एंबुलेंस, पिकअप गाड़ी से लेकर आए:
राधेश्याम ने बताया कि घटना को लेकर हमने एंबुलेंस को सूचना दी। क्योंकि मोटरसाइकिल पर लाना संभव नहीं था। एंबुलेंस वाले ने पहले कहा कि आता हूं। कुछ समय बाद कहा कि खराब हो गई। फिर हमने पिकअप का इंतजाम किया। उससे लेकर अस्पताल आ रहे थे। तब रास्ते में हमें एंबुलेंस मिली। इसके बाद रास्ते में एंबुलेंस में रखकर जिला अस्पताल लाए, लेकिन यहां पर उन्हें बचाया नहीं जा सका।









































