पदमेंश न्यूज़, बालाघाट। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यो की धुरी ग्राम पंचायत,जनपद पंचायत व जिला पंचायत कहलाती है, जहां से विकास कार्य किए जाते है, लेकिन इन दिनों इन संस्थानों के अधिकारी-कर्मचारी अपने ही अधिकारी जिला पंचायत सीईओ के विरोध में एकजुट हो गए है।जिन्होंने शुक्रवार से तीन दिवसीय सामूहिक अवकाश लेकर हड़ताल शुरु कर दी है। ऐसी स्थिति में ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत व जिला पंचायत में कामकाज ठप हो गए है। इस हड़ताल की खास बात यह भी रही है कि इस विरोध में जनपद पंचायतों के सीईओ भी जिला पंचायत सीईओ के विरोध में शामिल रहे है। यहां हड़ताल के पहले दिन अधिकारी-कर्मचारी स्थानीय मोती तालाब गार्डन में एकजुट हुए और आगामी आंदोलन की रुप रेखा उन्होंने तैयारी की।वही जिला पंचायत सीईओ के विरुद्ध उचित कार्रवाई कर उन्हें तत्काल बालाघाट से हटाने की मांग को लेकर अधिकारी-कर्मचारियो ने मोती उद्यान से कलेक्ट्रेट कार्यालय तक रैली निकालकर ज्ञापन भी सौपा है। जिसमें उन्होंने माग पूरी न होने पर यह आंदोलन आगे भी जारी रखने की चेतावनी दी है।
इन मांगों को लेकर अधिकारी-कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
प्रदर्शन के दौरान बताया गया कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत प्रतिदिन वीसी शाम 6 बजे से लेकर रात 8 से 9 बजे तक लेते है, एवं वीसी में अधिकारी-कर्मचारियों के साथ अभद्र भाषा का उपयोग करते है। इससे विभाग में पदस्थ महिला एवं अन्य अधिकारी-कर्मचारियों को कठिनाई होती है। इसलिए वीसी कार्यालयीन समय पर एवं साप्ताहिक आयोजित की जाए,आकस्मिक अवकाश की स्वीकृति, जिनकी पदस्थापना जहां हो उस अधिकारी के द्वारा की जाए,अनावश्यक रुप से जिला पंचायत में बुलाकर नियम विरुद्ध कार्य करवाने के लिए अधिकारी व कर्मचारियों को बाध्य किया जाता है, वह न किया जाए।वहीं योजनाओं के दैनिक प्रगति के आधार पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की वेतन कटोती की जाती है जिसे बंद किया जाए एवं जिन कर्मचारियों का वेतन काटा गया है उन्हें वापस किया जाए,आकस्मिक स्थिति को छोड़कर कार्यालयीन दिवसों में ही समीक्षा बैठकों का आयोजन किया जाए, सर्वप्रथम नियम विपरीत कार्य करवाए जाने के लिए बाध्य किया जाता है, उसके बाद उन्हीं कार्यो का स्वभ्रमण करके उसी प्रकरण में पेशी लगाई जाती है। वही अनावश्यक पंचायतों को परेशान किया जाता है, इसे न किया जाए,सचिव एवं सहायक सचिवों एवं अन्य अधिकरी-कर्मचारियों के स्थानांतरण पर रोक लगी होने के बावजूद उन्हें स्थान पर कार्य करने के लिए आदेशित किया जाता है, इस पर रोक लगाई जाए,पुराने अपूर्ण प्रधानमंत्री आवासों को पूर्ण किए जाने के लिए अनावश्यक दबाव बनाया जाता है,ऐसा नहीं किया जाए।सीएम हेल्पलाइन बंद कराए जाने के लिए अनावश्यक दबाव बनाया जाता है, साथ ही सीएम हेल्पलाइन में मांग आधारित एवं फोर्स क्लोज के प्रकरणों पर जिला स्तर पर स्पेशल क्लोज किए जाने की कार्रवाई की जाए उन्होंने बताया कि मनरेगा योजना मांग आधारित है,इसमें टारगेट फिक्स कर लेबन नियोजन के लिए अनावश्यक दबाव बनाकर नियम विरुद्ध कार्य करने के लिए बाध्य किया जाता है, इस पर रोक लगाई जाए और मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को बालाघाट से तत्काल हटाया जाए।
तो 2 मार्च से किए जाएंगे बड़े आंदोलन
विरोध के प्रथम दिन गायत्री कुमार सारथी अध्यक्ष मुख्य कार्यपालन अधिकारी संगठन,सुनिल हिरकने अध्यक्ष, सहायक अभियंता संघ,भीवराम भोयर,अध्यक्ष, जितेन्द्र सेवईवार,मुकेश पालेवार,सुरेश श्रीवास्त्री सहित अन्य ने बताया कि जिले में पदस्थ मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अभिषेक श्रराफ के द्वारा पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग के समस्त अधिकारी-कर्मचारियों के साथ अनावश्यक दबाव बनाकर कार्य करवाया जाता है, एवं दुव्र्यहार किया जाता है। जिससे समस्त कर्मचारी व अधिकारी आहत हो रहे है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कई बार अवगत कराया गया है, लेकिन उनके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं हो रहा है जिसके चलते मजबूरी में सभी कर्मचारी-अधिकारियों ने तीन दिन की सामूहिक अवकाश लेकर यह हड़ताल शुरु की है, इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं होगा तो दो मार्च से बड़ा आंदोलन को किया जाएगा।









































