डेंगू से एक और मौत!:भोपाल में 10 दिन में तीसरी डेथ; निजी अस्पतालों को टेस्ट, ट्रीटमेंट पता नहीं

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राजधानी भोपाल में डेंगू का प्रकोप लगातार जान ले रहा है। इसके बावजूद मलेरिया विभाग शहर में डेंगू के खतरे को मानने को तैयार नहीं है। हद की बात तो ये है कि अस्पतालों में डेंगू से मौतें होने के बाद भी मलेरिया विभाग एलाइजा टेस्ट का राग अलाप रहा है। बैरागढ़ में दो सगे भाइयों की मौत के बाद शुक्रवार देर रात राजधानी के एक निजी अस्पताल में 15 साल के बच्चे की डेंगू से डेथ हो गई।

कोलार में रहने वाले 15 साल के युवराज को बुखार आ रहा था। डॉक्टरों ने उसे डेंगू बताया। परिजन ने स्थानीय स्तर पर इलाज कराया, लेकिन आराम नहीं मिला। चार दिन पहले बच्चा अचानक बेहोश हो गया। परिजन ने उसे निजी अस्पताल में एडमिट कराया। डॉक्टरों ने उसकी खराब हालत को देखकर वेंटिलेटर पर शिफ्ट कर दिया, लेकिन बच्चे के अंगों ने काम करना बंद कर दिया। शुक्रवार देर रात उसने दम तोड़ दिया। राजधानी में 10 दिन के भीतर डेंगू से यह तीसरी मौत हुई है। शहर में अब तक डेंगू से पांच मौतें हो चुकी हैं। हालांकि, मलेरिया विभाग एक भी मौत मानने को तैयार नहीं है।

बैरागढ़ में दो सगे भाइयों की डेंगू से हुई मौत

पिछले हफ्ते संत हिरदाराम नगर क्षेत्र के वन ट्री हिल्स निवासी राजपूत परिवार के दोनों बेटों की मौत डेंगू से हुई थी। परिवार के बड़े बेटे राजीव राजपूत (19) की तबीयत खराब होने पर उसे एक निजी अस्पताल में दाखिल कराया। यहां उसकी तबीयत में सुधार नहीं हुआ, तो अपेक्स अस्पताल लेकर पहुंचे।

24 नवंबर को रैपिड कार्ड से टेस्ट किया गया। एनएस-1 पॉजिटिव आने पर डेंगू का इलाज शुरू किया गया। यहां भी बात नहीं बनी तो उसे बंसल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उसकी मौत हो गई। मंगलवार को दूसरे बेटे तरुण राजपूत (16) की मौत हो गई। उसे भी डेंगू की पुष्टि होने पर एम्स में इलाज के लिए भर्ती किया गया था। इससे पहले संतनगर में ही 29 अक्टूबर को संजय गिरी गोस्वामी (35), 13 नवंबर को प्रदीप मोतियानी (26) की डेंगू के कारण मौत हुई थी।

विभाग असहाय …लेटर ने खोली पोल

मलेरिया विभाग यह दावा करता है कि डेंगू, मलेरिया का सीजन शुरू होने के पहले ही शहर के सरकारी, निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम्स के संचालकों, डॉक्टरों की कार्यशाला आयोजित की जाती है। इस वर्कशॉप में निजी, सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों को यह साफ बताया जाता है कि डेंगू की जांच के लिए रैपिड कार्ड से टेस्ट को भारत शासन से मान्यता नहीं है। डेंगू की जांच के लिए एलाइजा टेस्ट कराना जरूरी है। इसके बावजूद शहर के निजी अस्पताल मरीजों की रैपिड कार्ड से डेंगू की जांच करके इलाज कर रहे हैं। मलेरिया विभाग और स्वास्थ्य महकमा निजी अस्पतालों की मनमानी पर रोक लगाने में असहाय नजर आ रहा है।

डेंगू के लक्षणों, जांच और इलाज में इन बातों का ख्याल रखना जरूरी

  • किसी भी सामान्य व्यक्ति को 02 से 07 दिवस तक के बुखार के साथ में सिर दर्द, आँखों के पीछे दर्द मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों में दर्द, शरीर पर लाल चकत्ते दिखाई दें तो डेंगू बुखार हो सकता है।
  • डेंगू बुखार के संभावित लक्षणों वाले मरीज को बुखार आने के पहले पांच दिन की अवधि में एंटीजन बेस्ड किट (NS-1 एन्टीजन एलाईजा किट) से डेंगू की जांच के लिए एलाईजा टेस्ट कराएं
  • डेंगू संभावित मरीज की पांच दिवस (05) से ज्यादा अवधि का बुखार से पीड़ित मरीज की डेंगू की जांच एंटीबॉडी बेस्ड किट (मेक एलाईजा किट) से एलाईजा पद्धति से कराई जाए।
  • डेंगू की जांच हेतु केवल एंटीजन बेस्ट एलाईजा किट (एनएस 1 एलाइजा किट) अथवा एंटीबॉडी बेस्ट किट (मेक एलाईजा किट) से पुष्टि कराने के निर्देश दिए गए हैं।
  • डेंगू की जांच के लिए रेपिड डायग्नोस्टिक किट, डेंगू रेपिड कार्ड टेस्ट को अधिकांश मामलों में फॉल्स पाजिटिव रिजल्ट देने के कारण भारत सरकार द्वारा मान्य नहीं किया गया है।
  • डेंगू रोग की पुष्टि के लिए सबसे पहले बुखार के मरीज की कम्पलीट ब्लड काउन्ट (CBC)जांच कराई जाए इस जांच में प्लेटलेट की संख्या(प्लेटलेट्स काउंट) को निरंतर मॉनीटर किया जाना चाहिए। जिन मरीजों में लगातार प्लेटलेट की संख्या कम हो रही हो उनमें डेंगू की पुष्टि के लिए बुखार की अवधि के आधार पर एंटीजन बेस्ट एलाईजा किट (एनएस 1 एलाइजा किट) अथवा एंटीबॉडी बेस्ट किट (मेक एलाईजा किट) से की जानी चाहिए।
  • डेंगू से संक्रमित मरीजों में केवल आवश्यकता पड़ने पर ही (प्लेटलेट काउंट 10 हजार यूनिट से कम होने पर) प्लेटलेट लगाई जा सकती है।
  • डेंगू की पुष्टि के बाद मरीज को पूर्णतः आराम करने की सलाह दी जाती है। संभवतः शरीर के तापमान को कोल्ड स्पॉन्जिंग के द्वारा 39 डिग्री सेंटीग्रेड से नीचे बनाये रखें। बुखार को रोकने के लिए एस्प्रीन, आइबुप्रोफिन आदि दवाओं का उपयोग न करें। इन दवाओं के बजाए केवल पेरासिटामॉल टेबलेट का उपयोग करें। मरीजों को मच्छरदानी में रखें।
  • डेंगू के रोगियों का पर्याप्त हायड्रेशन होना जरूरी है इसलिए डेंगू के मरीज को पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ का सेवन करने की सलाह दी जाती है।

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