दिव्यांगों और गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

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कोरोना महामारी के खिलाफ दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान भारत में चल रहा है। इस बीच, सोमवार को सुप्रीम कोर्च में एक जनहित याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें मांग की गई थी कि दिव्यांगों को टीकाकरण में प्राथमिकता दी जाए और उन्हें उनके निवास स्थान पर जाकर टीके लगाए जाएं। इस पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा और सॉलिसिटर जनरल से यह अनुरोध भी किया कि वह सरदार द्वारा इस दिशा में पहले ही उठाए जा चुके कदमों के संबंध में अदालत को जानकारी दें।

सुप्रीम कोर्ट सोमवार को गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को उच्च जोखिम वाली श्रेणी घोषित करने और COVID-19 टीकाकरण के लिए प्राथमिकता देने के लिए केंद्र को निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) की याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया और दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा। डीसीपीसीआर की ओर से पेश अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने कहा कि केंद्र ने गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के टीकाकरण के लिए कुछ दिशानिर्देश जारी किए हैं लेकिन अब कहा जा रहा है कि टीकाकरण के कारण उन पर कुछ प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

इस बीच, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में बीते 24 घंटों में कोरोना के 30,256 नए केस सामने आए हैं। इस दौरान 43,938 मरीज ठीक हुए हैं और 295 की मौत हुई है। इस तरह देश में कोरोना के कुल मरीजों की संख्या 33,478,419 पहुंच गई है। अभी देश में 3,18,181 एक्टिव केस हैं। कुल 3,27,15,105 लोग कोरोना को मात दे चुके हैं। देश में कोरोना महामारी अब तक 4,45,133 मरीजों की जान ले चुकी है। वहीं टीकारण जारी है। अब तक देश में कुल 80,85,68,144 लोगों को टीका लगाया जा चुका है। पिछले 24 घंटों में 37,78,296 लोगों को टीका लगा है।

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