जब शिवानी घर पहुंची तो मां वंदना प्रजापति ने उसे गले लगाया।
शिवानी जब यूक्रेन सकंट के दर्दभरे हालातों को बयां कर रही थी विधायक गायत्री राजे पंवार ने उसे संबल दिया और बेटी की तरह शिवानी का हाथ थामे रखा
Russia attack on Ukraine: देवास(नईदुनिया प्रतिनिधि)। मैं तिरंगे के सहारे देश पहुंची हूं…नाइजीरियन, यूक्रेन, अफ्रीकन और पाकिस्तान के विद्यार्थी हमारे साथ थे। वे भी सभी हमारे देश के तिरंगे के साथ में बार्डर पर पहुंच सके। वे सभी कह रहे थे कि भारत के झंडे के बिना कैसे जाएंगे। मेरी रूम पार्टनर पाकिस्तानी थी। उसने मुझसे कहा कि तुम्हारे देश का झंडा मेरे अलावा किसी को मत देना। मैं तिरंगा उसके हाथों में देकर आई थी। मैंने उसे हंसते हुए कहा था कि भारत माता की जय बोलोगी, तब तिरंगा दूंगी। उसने बोला भारती माता की जय…फिर मैंने उसे फ्लैग दिया। उसने पाकिस्तान में फोन कर बताया कि भारत की दोस्त ने मुझे तिरंगा झंडा दिया है और इससे वह सुरक्षित बार्डर पर पहुंची थी। मुझे विदेश में भारतीय होने पर गर्व महसूस हो रहा था। मैं पांच देशों से होकर आई हूं। जहां-जहां गए, तिरंगे के साथ हमारा स्वागत किया गया।
मुश्किलों के बीच गर्व के पल की यह कहानी यूक्रेन से लौटी देवास के बालगढ़ की रहने वाली मेडिकल छात्रा शिवानी प्रजापति की है। वे टर्नोपिल में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही थीं। शिवानी गुरुवार रात देवास पहुंची थी। शुक्रवार सुबह विधायक गायत्री राजे पवार शिवानी के घर पहुंचीं। उनका स्वागत कर मिठाई खिलाई गई। शिवानी ने बताया कि हम भारत से जाते हैं तो तिरंगा झंडा लेकर जाते हैं। यूक्रेन व रुस के युद्ध के बीच भारत का तिरंगा हमारी ढाल बना और उसके सहारे सुरक्षित पहुंचे हैं। विदेशों में प्रधानमंत्री की वजह से सम्मान मिला है। पैसा नहीं था, फिर भी विदेशों में हमारा सम्मान हुआ, बेहतर व्यवस्था मिली। विधायक को देखकर शिवानी बेटी की तरह उनसे लिपट गई।
बर्फबारी में 25 किमी पैदल चली
शिवानी ने बताया कि टर्नोपिल से पोलैंड के लिए निकले थे। पोलैंड बार्डर पर भीड़ थी। पता चला कि 50 किमी पैदल चलना होगा तो हम पोलैंड से रोमानिया की तरफ शिफ्ट हुए। तीन दिन और चार रात पहुंचने में लगे। बार्डर पर यूक्रेन वालों को प्राथमिकता दे रहे थे। खाने को कुछ नहीं था, सिर्फ स्नेक्स थे। रोमानिया बार्डर पर स्नेक्स ही खाया। यूक्रेन की साइड होने से बार्डर पर कुछ भी नहीं मिल रहा था। बर्फबारी में खुले में रहे। तापमान भी करीब माइनस चार डिग्री रहा होगा। मैं वो पल सोचकर सिहर उठती हूं। वो मंजर दर्दभरा था।
रास्ते में सामान फेंकना पड़ा
शिवानी ने बताया कि रोमानिया बार्डर पर करीब 200 से ज्यादा भारतीय विद्यार्थी थे। दो घंटे में सिर्फ दस दस विद्यार्थियों को एंट्री दी जा रही थी। लोगों को डंडे भी मारते थे, जिससे भी डर लगता था। बार्डर तक पहुंचने के लिए करीब 25 किमी का सफर करना पड़ा। साथ में लगेज था। सामान ज्यादा होने से पैदल चलना मुश्किल था। सामान रास्ते में फेंका। पानी की बड़ी बोतल भी फेंकनी पड़ी।
विधायक ने कहा- ये गर्व की बात है
विधायक गायत्री राजे पवार ने बताया कि मोदी सरकार की पहल पर बच्चों का आना शुरू हुआ है। पीएम मोदी के संबंधों के कारण बच्चों को विदेश में अच्छा ट्रीटमेंट मिला। बच्चों ये लगा नहीं कि वे इंडिया से बाहर हैं।
ये भी गर्व का पल, यूक्रेन के ड्राइवरों को दिए तिरंगे
शिवानी ने बताया कि वो रोमानिया के बुखारेस्ट में ठहरे थे। बस ने रोमानिया बार्डर से पहले ही उतार दिया था। बस ड्राइवर यूक्रेन के थे। उन्हें हमें छोड़कर वापस उनकी सिटी जाना था। वे भी डर रहे थे, क्योंकि इंडियन उनके साथ थे जब तक वे सुरक्षित महसूस कर रहे थे। ड्राइवरों का कहना था कि वापस बस लेकर कैसे जाएंगे। हमने भारतीय फ्लैग व आइकार्ड दिए ताकि वे सुरक्षित पहुंचें।
हमारे विद्यार्थियों के लिए पीएम मोदी ने रुकवाया युद्ध
शिवानी ने बताया कि खार्कीव में भारत के बच्चे रह गए थे तो पीएम मोदी ने युद्ध को थोड़ी देर के लिए बंद करवाया। रूस वाले कहते थे कि इंडिया फ्लैग रखोगे तो कोई कुछ नहीं करेगा। इसके कारण भारतीय युद्ध के बीच आसानी से निकल रहे थे। हमने बार्डर पर फ्लैग के साथ गर्व महसूस किया।










































