नए लेबर कानून से बड़ा बदलाव, पूरे देश में छुट्टियों को लेकर एक जैसे नियम, इन कर्मचारियों को मिलेगा ये हक!

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New Labour Code: भारत में श्रम कानूनों को सरल और एक जैसा बनाने के लिए सरकार ने नई श्रम संहिताएं (Labour Codes) तैयार की हैं। इन्हीं में से एक है Occupational Safety, Health and Working Conditions (OSH&WC) Code 2020 । इस नए कानून का उद्देश्य देशभर में अलग-अलग राज्यों में लागू पुराने और जटिल नियमों को हटाकर एक समान व्यवस्था बनाना है, ताकि कर्मचारियों और कंपनियों दोनों के लिए नियम स्पष्ट और आसान हो सकें। हालांकि यह कानू (NewLabour Law)न अभी पूरी तरह लागू नहीं हुआ है क्योंकि कई राज्यों ने इसके लिए अपने नियम अभी तक अधिसूचित नहीं किए हैं। उम्मीद है कि इसे 21 नवंबर 2025 के बाद चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। तो आइए जानते हैं छुट्टी (Leave) और लीव एनकैशमेंट (Leave Encashment) के नियमों में क्या बदलाव हुआ है?

छुट्टी (Leave) के नियमों में क्या बदलाव हुआ?

नए लेबर कोड में कर्मचारियों की अर्जित छुट्टी (Earned Leave) को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। अब पूरे देश में एक समान नियम लागू करने की कोशिश की गई है। नए नियमों के मुताबिक हर 20 दिन काम करने पर 1 दिन की अर्जित छुट्टी (Earned Leave) मिलेगी। अधिकतम 30 दिन की छुट्टी अगले साल के लिए आगे बढ़ाई जा सकेगी। 30 दिन से ज्यादा छुट्टी जमा होने पर उसका कैश भुगतान (Encashment) किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि कर्मचारी अपनी जरुरत से ज्यादा जमा छुट्टी को पैसे में बदल सकते हैं।

लीव एनकैशमेंट (Leave Encashment) क्या होता है?

लीव एनकैशमेंट का मतलब है कि अगर किसी कर्मचारी के पास बची हुई छुट्टियां हैं, तो वह उन्हें इस्तेमाल करने की बजाय उनके बदले पैसे ले सकता है। नए कानून के अनुसार 30 दिन से ज्यादा जमा छुट्टियां होने पर उनका भुगतान मिलेगा। कर्मचारी हर साल अपनी जमा छुट्टियों का नकद भुगतान मांग सकता है। नौकरी छोड़ने पर भी इसका हिसाब साफ तरीके से किया जाएगा। एक्सपर्ट्स के अनुसार यह व्यवस्था कर्मचारियों के लिए ज्यादा पारदर्शी और फायदेमंद है।

किन कर्मचारियों को मिलेगा यह लाभ?

यह लाभ सभी कर्मचारियों को नहीं मिलेगा। यह सिर्फ उन लोगों पर लागू होगा जिन्हें कानून के अनुसार “वर्कर” (Worker) माना जाता है। इसके अंतर्गत शामिल हो सकते हैं, फैक्ट्री कर्मचारी, कॉन्ट्रैक्ट वर्कर (Contract Workers), फिक्स्ड टर्म कर्मचारी (Fixed-term Workers), लेकिन कुछ लोग इस दायरे से बाहर होंगे, जैसे मैनेजरियल (प्रबंधकीय) पदों पर काम करने वाले कर्मचारी, प्रशासनिक (Administrative) भूमिका वाले कर्मचारी, ऐसे सुपरवाइजरी कर्मचारी जिनकी सैलरी ₹18,000 प्रति माह से अधिक है। इसका मतलब यह है कि सभी कर्मचारियों को यह लाभ नहीं मिलेगा, यह उनकी नौकरी की प्रकृति पर निर्भर करेगा।

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