इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि Malwi Jajam Indore। मालवी बोली की मिठास और बारिश की रिमझिम बौछार से खुशनुमा हुई शाम का आनंद न केवल मालवी रचनाकारों ने लिया बलि्क श्रोताअों ने भी लिया। मालवी बोली के संरक्षण के लिए प्रयासरत संस्था मालवी जाजम का आयोजन इंटरनेट मीडिया के जरिए हुआ। इस अयोजन में इस बार नौतपा, बारिश की बूंदें और हरियाली का महत्व तीनों ही विषयों को रचनाकारों ने रचनाअों में शामिल किया था।
मालवी कवि नरहरि पटेल ने गांवों में फैले अंधविश्वास पर अपनी चिंता जाहिर करते हुए ग्रामीणों से कोरोना से बचाव के नियमों का पालन करने का निवेदन किया। यह बात उन्होंने ‘मास्क बांध लो, दूरी राख लो, महामारी ने दूर भगावो, वेक्सीन लगवावो’ के जरिए की। मुकेश इंदौरी ने ‘नोतपा में इत्तो नी तपयो जित्तो कोरोना ने तपई दियो, तीसरी लहर, ने काली काई ब्लेक फंगस को नाम सुणने पसीना छूटरिया है’ रचना सुनाकर दाद बटोरी। इस रचना के जरिए उन्होेंने इस बात पर भी बल दिया कि हरियाली कम कर हमने खुद के लिए ही परेशानी मोल ले ली है। यह बात इन्होंने ‘लोगा को आक्सीजन लेवल गिररियो है, अस्पतालां में इंकी कमी से मनक मरीरिया है, झाड़काओंन के काटती टेम जरा भी नी सोचयो, आपणां पगा पे कुल्हाड़ी मार ने अब आंसू बहईरिया है, लोग पीपल ने बरगद के याद करीरिया है’ के जरिए कही।
कुसुम मंडलोई ने पहली बारिश पर वर्षा का अभिनंदन लोक गीत ‘तपी तपी ने धरती तपस्या को फल पावे, गरजी गरजी मेवलो बरसे, मन म्हारो हर्षावे’ सुनाया। डा. शशि निगम ने ‘सखी बरखा की पेली फुहार पड़ी, सब खुशियां मनाओ’ गीत सुनाया। आयोजन में माया वदेका व भीमसिंह पंवार ने भी बारिश पर केंद्रीत रचना सुनाई। नंदकिशोर चौहान ने बिगड़ती संस्कृति ‘लीव इन’ पर और हरमोहन नेमा ने कोरोना में दिनचर्या पर आलेख पढ़ा। आयोजन में शिवनारायण चौधरी, रेणु मेहता आदि ने भी रचनापाठ किया।









































