पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन इससे पहले कांग्रेस की कैप्शन अमरिंदर सिंह सरकार की परेशानी बढ़ती जा रही है। पार्टी की अंदरूनी कलह के बीच बिजली की कमी ने नया संकट पैदा कर दिया है। एक तरफ आम आदमी पार्टी ने 24 घंटे बिजली की सुविधा का वादा किया है, वहीं कांग्रेस सरकार को बिजली की कमी के कारण सरकारी दफ्तरों का समय बदलना पड़ा है। राज्य सरकार ने गुरुवार को सरकारी कार्यालयों के समय में शुक्रवार से कटौती करने और उच्च ऊर्जा खपत करने वाले उद्योगों को तत्काल प्रभाव से बिजली आपूर्ति में कटौती करने का आदेश दिया। यह कदम फसलों को बचाने और घरेलू बिजली की स्थिति को आसान बनाने के लिए उठाया गया है।
आदेश में पंजाब के सीएम ने सभी सरकारी कार्यालयों से बिजली का विवेकपूर्ण उपयोग करने की अपील की क्योंकि राज्य में पीक डिमांड 14500 मेगावाट तक पहुंच गई थी। अगले आदेश तक सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक चलने वाले सरकारी कार्यालयों में एसी के इस्तेमाल पर रोक पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है।
इससे पहले पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने गुरुवार से रोलिंग मिलों और इंडक्शन फर्नेस सहित उद्योग पर बिजली नियामक उपाय लागू किए। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि पंजाब में बिजली की मांग एक दिन में 14,000 मेगावाट से अधिक हो गई है, जिससे राज्य के स्वामित्व वाली बिजली कंपनी पीएसपीसीएल को उद्योग पर अनिर्धारित बिजली कटौती और नियामक उपायों को लागू करने के लिए मजबूर होना पड़ा। पीएसपीसीएल के मुताबिक, बुधवार को मांग 12,842 मेगावाट की आपूर्ति के मुकाबले 14,142 मेगावाट पर पहुंच गई, जिससे 1,300 मेगावाट का अंतर रह गया।
बिजली गुल, राजनीति चालू: मामले पर अब सियासत चालू हो गई है। विपक्षी अकाली दल ने शुक्रवार को प्रदेश भर में प्रदर्शन करने का फैसला किया है। आम आदमी पार्टी ने भी कैप्शन सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।









































