सागर के कनेरा देव निवासी 94 वर्षीय रामसहाय पांडेय के घर में मंगलवार की शाम जश्न का माहौल था। शाम को जब राई नर्तक पांडेय को पदम श्री पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की जानकारी मिलते ही पूरे शहर में खुशी छा गई। पांडेय के परिचित व कई लोग उन्हें बधाई संदेश देने पहुंचे। वहीं श्री पांडेय भी यह पुरस्कार दिए जाने की घोषणा से गदगद थे।
पांडेय ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि उनकी लगन व मेहनत को देखते हुए कभी न कभी इसके लिए उन्हें यह सम्मान दिया जाएगा। 94 वर्षीय श्री पांडेय 17-18 साल की उम्र से राई नृत्य करते आ रहे हैं। इसके लिए उन्होंने सामाजिक बहिष्कार झेला, लेकिन उन्होंने हार नहींं मानी।
वे लगातार राई नृत्य के अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का काम करते रहे। आज बुंदेलखंड का यह नृत्य अपनी अलग पहचान बना चुका है, उसमें श्री पांडेय का बहुत बड़ा श्रेय जाता है। पांडेय का जन्म 11 मार्च 1933 को मडधार पठा में हुआ था। इनके पिता का नाम लालजू पांडेय व माता का नाम करैयाबाली था। इनके पिता खेती व गांव के ही मालगुजार के यहां काम करते थे।










































