Electoral Violence in West Bengal: पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान हिंसा और अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में केंद्र सरकार और राज्य सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखी जाए और सरकारी व न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
याचिका में कहा गया है कि राज्य में कई वर्षों से चुनाव के समय हिंसा, धमकी और डर का माहौल बना रहता है। इससे न केवल आम लोगों के अधिकार प्रभावित होते हैं बल्कि चुनाव की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
क्या है याचिका में मांग
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बल तैनात करे। साथ ही यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार को चुनाव के दौरान और उसके बाद कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने के लिए स्पष्ट आदेश दिए जाएं।
ये याचिका को दिल्ली निवासी सतीश कुमार अग्रवाल ने दायर किया है। याचिका के अनुसार वे सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे हैं और समाज के विभिन्न मुद्दों को उठाते रहे हैं। उन्होंने यह याचिका व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि आम जनता के हित में दाखिल करने की बात कही है। याचिका में कहा गया है कि उनका उद्देश्य नागरिकों के मूल अधिकारों की रक्षा करना, चुनाव प्रक्रिया को सुरक्षित बनाना और अधिकारियों को भय मुक्त माहौल में काम करने की सुविधा दिलाना है। सुप्रीम कोर्ट के जाने माने वकील बरुण कुमार सिन्हा इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में बहस करेंगे।
इसके अलावा याचिका में यह भी मांग की गई है कि चुनाव पूरी तरह से स्वतंत्र, निष्पक्ष और बिना किसी दबाव के कराए जाएं।
चुनाव के दौरान हिंसा के आरोप
याचिका में कई घटनाओं का जिक्र किया गया है, जिनमें दावा किया गया है कि चुनाव के दौरान अधिकारियों को घेर लिया गया, धमकाया गया और कई जगहों पर काम करने से रोका गया।
मार्च 2026 में नदिया जिले में वोटर जांच कर रहे अधिकारियों को भीड़ ने घेर लिया था। इसी तरह हुगली जिले में चुनाव से जुड़े काम कर रहे सरकारी कर्मचारियों को धमकाने की बात भी सामने आई।
अप्रैल 2026 में मालदा जिले में सात न्यायिक अधिकारियों को कई घंटों तक घेर कर रखा गया। बाद में पुलिस और सुरक्षा बलों की मदद से उन्हें बाहर निकाला गया। इस घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी गंभीर टिप्पणी की है।
ईडी की कार्रवाई में बाधा का आरोप
याचिका में जनवरी 2026 की एक घटना का भी जिक्र किया गया है, जब प्रवर्तन निदेशालय ने कुछ स्थानों पर छापेमारी की थी। आरोप है कि इस कार्रवाई के दौरान राज्य के अधिकारियों की तरफ से हस्तक्षेप हुआ और जांच में बाधा डाली गई।
याचिका में कहा गया है कि इस तरह की घटनाएं कानून के शासन को कमजोर करती हैं और जांच एजेंसियों के काम पर असर डालती हैं।
पुराने चुनावों का भी जिक्र
याचिका में पिछले चुनावों के दौरान हुई हिंसा का भी उल्लेख किया गया है। इसमें 2013 और 2018 के पंचायत चुनावों का हवाला देते हुए कहा गया है कि उस समय भी कई लोगों की जान गई थी और कई सीटों पर बिना मुकाबले जीत दर्ज की गई थी।
इन घटनाओं को आधार बनाते हुए याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि राज्य में चुनावी हिंसा एक लगातार चलने वाली समस्या बन गई है, जिसे रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है।
अधिकारियों की सुरक्षा पर सवाल
याचिका में खास तौर पर न्यायिक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई है। कहा गया है कि जब अधिकारी ही सुरक्षित नहीं होंगे तो वे स्वतंत्र रूप से अपना काम नहीं कर पाएंगे।
याचिकाकर्ता का कहना है कि कई मामलों में अधिकारियों को डर के माहौल में काम करना पड़ा, जिससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई।
सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से कहा गया है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करे और स्पष्ट दिशा निर्देश जारी करे। इसमें यह भी कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बलों की तैनाती बढ़ाई जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो।









































