मध्यप्रदेश शासन स्टेट कॉरपोरेशन की घोर लापरवाही की वजह से जिला मुख्यालय से 5 किलोमीटर दूर खुरसोड़ी ओपन कैप में रखी 360 मेट्रिक टन धान पूरी तरह खराब होने की कगार पर पहुंच चुका है हालात इतनी अधिक खराब है कि धान में अंकुरण आ चुकी है और पास जाने पर ध्यान पूरी तरह से दुर्गंध मार रही है।
जब हमने इस विषय पर विभाग के जिम्मेदार अधिकारी महेंद्र ठाकुर से चर्चा की तो उन्होंने बताया कि खुरसोड़ी ओपन केप में रखी धान बीते वर्ष की है सड़क खराब होने की वजह से भारी वाहन ओपन कब तक नहीं पहुंच पाए। इस कारण धान लगातार रखी रह गई उसके बाद मिलर्स ने धान लेने से इंकार कर दिया नतीजा धान पानी की नमी की वजह से और अधिक प्रभावित हो गई।
जानकारी के अनुसार अब धान को नीलाम करने की तैयारी की जा रही है नतीजा साफ है स्थिति स्पष्ट दिखाई दे रही है की स्टेट कारपोरेशन वेयरहाउस को इस बात का अंदाज हो चुका है कि धान किस हालात में है और मिलर्स क्यों नहीं उठा रहे हैं इसीलिए इसे नीलाम किया जाएगा।
मतलब साफ है कि खुरसोड़ी ओपन कैप में धान रखी गई जब इस कैप तक पहुंचने के लिए सड़क पूरी तरह से खराब है तो फिर धान यहां पर रखी क्यों गई? जब यहां से धान का परिवहन नहीं हो सकता था तो फिर धान यहां रखी क्यों गई? ना जाने ऐसे कितने बहुतेरे सवाल अब लोगों के जहन में उठ रहे हैं जो भी इस कैप के बाजू से जाता है। वह कुछ देर के लिए स्तब्ध हो जाता है कि बारिश शासन वारी प्रशासन गरीब यहां पर एक एक अन्य के दाने के लिए तरस रहा है और उसने इतनी बड़ी मात्रा में धान खुले में केवल साढ़ाने के लिए रख दी?
बड़ा सवाल यहां यह भी उठता है कि बारिश तो केवल 4 महीने हुई थी। उसके बाद 8 महीने तक इस धान का परिवहन क्यों नहीं किया गया? इसे सुरक्षित स्थान पर क्यों नहीं पहुंचाया गया? उस समय क्यों नहीं इसकी नीलामी कर दी गई? जब यह धान किसी गरीब की थाली तक पहुंचने के लायक था क्यों इतना लंबा इंतजार किया गया?
आज भी जब हम जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल कर रहे हैं तो नीलामी की बात कर रहे हैं ना जाने इस नीलामी प्रक्रिया सरकारी कागजी कार्रवाई में कितना समय लगता है। और ना जाने यह इतनी बड़ी मात्रा में 360 मेट्रिक टन धान किसी काम भी आती है या फिर यही खुरसोड़ी ओपन कैप में पूरी तरह सड़ कर बर्बाद हो जाती है?
निश्चित की एक छोटी सी लापरवाही पर शासन के आला अधिकारी अपने अधीनस्थों पर कार्रवाई करने से चुकते नहीं है। फिर इतनी बड़ी लापरवाही किसने की क्या यह पूरा मामला आला अधिकारियों के संज्ञान में था। या फिर इसकी जानकारी नहीं थी। यह बड़ा सवाल है क्या इस पूरे मामले पर किसी पर कार्रवाई होगी? किसी पर निलंबन की गाज गिरेगी? किसी से वसूली की जाएगी या फिर इतनी बड़ी मात्रा में बर्बाद हुए धान पर अब तक की खामोशी आगे भी बरकरार रहेगी?










































