करीब 3 साल से अटकी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को एक और झटका लगा है, उच्च न्यायालय जबलपुर के द्वारा आरक्षण संबंधी लंबित याचिका के निराकरण को लेकर ओबीसी अभ्यर्थियों को 27 प्रतिशत आरक्षण की जगह 14 प्रतिशत आरक्षण पर नियुक्ति दिए जाने और 13 प्रतिशत आरक्षण होल्ड पर रखे जाने पर विचार किया जा रहा है जिससे कॉफी छात्रों के भविष्य पर प्रश्न चिन्ह लग गया है जिसको लेकर शुक्रवार को चयनित अभ्यर्थियों ने जहां एक ओर जनप्रतिनिधियों के समक्ष अपनी बातों को रखा वहीं जिला प्रशासन को ज्ञापन के माध्यम से अपनी समस्या से अवगत कराया।
शासन के द्वारा 13 प्रतिशत आरक्षण होल्ड पर रखकर भर्ती प्रक्रिया पूर्ण करने की रखी जा रही मांग
जानकारी के मुताबिक उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा आरक्षण से संबंधित लंबित याचिकाओं में पारित अंतरिम आदेश दिनांक 13 जुलाई 2021 में ईडब्ल्यूएस हेतु आरक्षित 10 प्रतिशत अभ्यर्थियों को उच्च न्यायालय जबलपुर में लंबित याचिकाओं के अधीन सशर्त नियुक्ति देने का आदेश पारित किया गया है किंतु शासन की ओर से अधिवक्ता पुष्पेंद्र कौरव द्वारा अंतिम सुनवाई से पूर्व ही अभिमत दिया गया था कि ओबीसी वर्ग को 14 फ़ीसदी आरक्षण भी दिया जाए और 13 प्रतिशत आरक्षण होल्ड पर रखा जाए और इसी तरह की मांग उच्च न्यायालय जबलपुर में दिनांक 13 जुलाई को शासन की ओर से महाधिवक्ता द्वारा की गई जिसकी पुष्टि शासन की मांग अनुसार उच्च न्यायालय ने भी की है जिसे तर्कसंगत नहीं कहा जा सकता जिसको लेकर ओबीसी के चयनित अभ्यर्थियों के द्वारा शासन से मांग की गई है कि इस विषय को लेकर वह सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दायर करें।
3 साल से जॉइनिंग के लिए परेशान हैं अभ्यर्थी- सुनील कुमार बिसेन
इस संदर्भ में पद्मेश न्यूज़ चर्चा के दौरान चयनित अभ्यर्थियों ने बताया कि वर्तमान में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को 14 प्रतिशत आरक्षण के हिसाब से नियुक्ति किए जाने का प्रावधान किया जा रहा है जो कि न्याय संगत नहीं है। उन्होंने कहा कि कमलनाथ सरकार के कार्यकाल में 27 फ़ीसदी ओबीसी के लिए आरक्षण तय किया गया था और उसी के तहत शिक्षक भर्ती चयन सूची और प्रतीक्षा सूची जारी की गई थी अब न्यायालय के माध्यम से इस निर्णय पर जोर दिया जा रहा है कि ओबीसी को इस भर्ती में 14 प्रतिशत आरक्षण के तहत नियुक्ति दी जाए 13 प्रतिशत आरक्षण को होल्ड पर रखा जाएगा उन्होंने कहा कि 3 साल से जॉइनिंग के लिए चयनित अभ्यर्थी परेशान है लेकिन इस तरीके से ओबीसी अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में यह भर्ती निकाली गई थी तब 27 प्रतिशत आरक्षण के तहत ही ओबीसी के चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति की जानी थी उन्होंने कहा कि उस दौरान एकलव्य स्कूल के भर्ती निकाली गई थी लेकिन अभ्यर्थियों ने इसलिए इस भर्ती में आवेदन नहीं किया कि उन्हें लग रहा था कि इस शिक्षक भर्ती में उनका भविष्य है यदि 14 प्रतिशत आरक्षण के तहत ओबीसी के चयनित अभ्यर्थियों का चयन होता है तो काफी आवेदक बाहर हो जाएंगे यदि शासन को इस तरह का निर्णय लेना था तो भर्ती के पूर्व बनाए गए नियम के तहत ही उन्हें इस नियम को लागू किया जाना था उन्होंने कहा कि चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है और हालात इतने बिगड़ गए हैं कि चयनित अभ्यर्थियों जनप्रतिनिधियों के समक्ष अपने अधिकारों के लिए चक्कर लगाना पड़ रहा है।
भीख नहीं अपना अधिकार मांग रहे हैं -चयनित अभ्यर्थी
इस संदर्भ में पद्मेश न्यूज़ से चर्चा के दौरान चयनित अभ्यर्थी शारदा फूलबांधे ने बताया कि 2018 में शिक्षक भर्ती के तहत वर्ग एक और वर्ग दो के लिए परीक्षा का आयोजन किया गया था उस दौरान ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण के तहत पूरी प्रक्रिया अपनाई गई थी लेकिन वर्तमान में इस प्रक्रिया में बदलाव किया जा रहा है जो कि अनुचित है उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में ओबीसी की सर्वाधिक जनसंख्या है और वोट बैंक भी सबसे अधिक है इसके बावजूद भी जनप्रतिनिधियों के माध्यम से आवाज उठाने पर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है उन्होंने कहा कि हम अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं किसी से भीख नहीं मांग रहे हैं उन्होंने कहा कि जब ई डब्ल्यू एस 12 से 13 फ़ीसदी है और उसे 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है एसटीएससी को भी जनसंख्या के आधार पर समानता के आधार पर आरक्षण मिल रहा है तो ओबीसी के साथ यह अन्याय क्यों किया जा रहा है।










































