भोपाल में कुछ जगहों के नाम बदलने की मांग के समर्थन में उमा भारती और प्रज्ञा ठाकुर

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भोपाल: भारती ने सोमवार को भोपाल के बाहरी इलाके में स्थित एक लोकप्रिय पिकनिक स्थल हलाली बांध का नाम बदलने की मांग करते हुए कहा कि वर्तमान नाम ‘विश्वासघात और घृणा’ की भावना को व्यक्त करता है। भोपाल से भाजपा की लोकसभा सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने मंगलवार को भारती की मांग का समर्थन किया और इसके साथ ही मध्य प्रदेश की राजधानी में लाल घाटी और इस्लाम नगर समेत कुछ अन्य जगहों के नाम भी बदलने की मांग की।भारती ने भोपाल जिले में बैरसिया विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक विष्णु खत्री को पत्र लिखकर कहा है कि हलाली नाम से इतिहास के परिप्रेक्ष्य में ‘विश्वासघात, धोखे और अमानवीयता की अभिव्यक्ति होती है।’

पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने खत्री से नाम परिवर्तन का यह मुद्दा प्रदेश की संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री उषा ठाकुर के सामने उठाने का आग्रह किया।यह बांध भोपाल जिले के बैरसिया विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है।अपने पत्र में भारती ने कहा कि भोपाल राज्य के संस्थापक दोस्त मोहम्मद खान ने हलाली बांध में अपने मित्र राजाओं को मार डाला था और पास की नदी का पानी उनके खून के कारण लाल हो गया था।

मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कहा, ‘इसलिए इस जगह का यह नाम नफरत की भावना पैदा करता है।’ भाजपा नेता ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार इस जगह का नाम बदल दिया गया है लेकिन पर्यटन निगम द्वारा लगाए गए साइन बोर्ड पर यह परिलक्षित नहीं होता है।उधर, विधायक विष्णु खत्री ने बताया कि सरकारी रिकॉर्ड में इस बांध का नाम सम्राट अशोक बांध है। लेकिन मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम अब भी अपने साइन बोर्ड पर इस जगह को हलाली बांध के रूप में लिखता है।

सत्तारूढ़ दल के विधायक ने कहा कि उन्होंने मंत्री उषा ठाकुर को पत्र लिखकर सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार इस स्थल (सम्राट अशोक बांध) का नाम बदलने का आग्रह किया है।इस बीच प्रज्ञा ठाकुर ने भारती की मांग का समर्थन किया और कुछ अन्य स्थानों के नाम भी बदलने की मांग की।स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि इस्लाम नगर का नाम इसलिए बदला जाए क्योंकि पहले इस नाम की कोई जगह नहीं थी। भोपाल में लाल घाटी का नाम दोस्त मोहम्मद खान के बेटे के खून की वजह से रखा गया था।

लोकसभा सांसद ने कहा, ‘हलाली नाम इसलिए रखा गया क्योंकि वहां हिंदू राजा मारे गए थे । इन सभी नामों को बदला जाना चाहिए और वास्तविक इतिहास को फिर से स्थापित किया जाना चाहिये। उमा दीदी इस संबंध में (नाम बदलने के लिए) प्रयास कर रही हैं। मैं भी इस दिशा में प्रयास कर रही हूं।’

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