देशभर में गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को मनाया जाएगा, लेकिन बड़ा गणेश मंदिर में गणतंत्र की स्थापना का महापर्व माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी पर नौ फरवरी को मनेगा। वजह 114 सालों से धर्म के साथ राष्ट्र आराधना का केंद्र रहे इस मंदिर में हिंदू धर्म के सभी प्रमुख व्रत-त्योहारों के साथ राष्ट्रीय पर्व तारीख नहीं, बल्कि तिथि के अनुसार मनाए जाते हैं। माघ कृष्ण चतुर्थी पर शुक्रवार को मंदिर का 115वां स्थापना दिवस भी तिल महोत्सव के रूप में भव्य रूप से मनाया जाएगा।
पंचांगकर्ता ज्योतिषाचार्य पं.आनंदशंकर व्यास ने अनुसार तारीख से पर्व-त्योहार मनाना अंग्रेजी परंपरा है। भारतीय सनातन संस्कृति में व्रत,त्यौहार पंचांगीय की तिथि के अनुसार मनाए जाते हैं। बड़े गणेश मंदिर में आज भी यह परंपरा कायम है, इसलिए धार्मिक त्यौहारों के साथ राष्ट्रीय पर्वों को भी तिथि के अनुसार ही मनाया जाता है। यह पहला मंदिर है, जहां हिन्दी दिवस भी तारीख नहीं बल्की तिथि के अनुसार मनाए जाने की परंपरा है।
माघ कृष्ण चतुर्थी पर हुई थी बड़े गणेश की स्थापना
पं.व्यास ने बताया कि 114 साल पहले माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन उनके दादा पं. नारायणजी व्यास ने महाराष्ट्र में पं.बाल गंगाधर तिलक गणेश उत्सव से प्रेरित होकर बड़े गणेश मंदिर की स्थापना की थी। यह मंदिर तभी से धर्म के साथ राष्ट्र आराधना का केंद्र बना हुआ है। इस मंदिर में आज भी प्रतिदिन राष्ट्र कल्याण व देश की उन्नाति में आने वाले विघ्नों के विनाश के लिए गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ किया जाता है।
इन तिथियों के अनुसार मनाए जाते हैं उत्सव
-स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 1947 ई. : द्वितीय माघ कृष्ण 13-14
-गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 1950 ई. : माघ शुक्ल अष्टमी
-हिंदी दिवस 14 सितंबर 1949 ई. : अश्नि कृष्ण सप्तमी
तिल चतुर्थी पर ये आयोजन
माघ कृष्ण चतुर्थी पर शुक्रवार को सुबह सात बजे भगवान बड़ा गणेश का पंचामृत अभिषेक पूजन किया जाएगा। पश्चात गणपति सहस्त्रनामावली से भगवान को एक हजार कमल पुष्प व एक हजार लड्डू अर्पित किए जाएंगे। आश्रम के वेदपाठी बटुक गणपति अथर्वशीर्ष के चार हजार पाठ करेंगे। दिन में दोपहर 12 बजे तथा शाम को सात बजे महाआरती की जाएगी।










































