मध्‍य प्रदेश में रिहायशी इलाकों से हाथियों को दूर रखने के लिए अनूठी कवायद !

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हाथी के उत्पात से प्रभावित मध्य प्रदेश के पांच जिलों (सीधी, सिंगरौली, बांधवगढ़ (उमरिया), अनूपपुर, डिंडौरी) में वन विभाग ने बाकायदा मुनादी पिटवाकर और पोस्टर लगाकर ग्रामीणों को आगाह किया है कि वे हाथी प्रभावित क्षेत्र में महुआ की शराब इस तरह से रखें कि उसकी महक बाहर न आए। अब तक के ज्यादातर मामलों में महुआ शराब ने ही हाथियों को आकर्षित किया है। वहीं चावल (इस क्षेत्र में चिन्नौर, श्रीराम, कालीमूंछ, जीराशंकर आदि किस्म के चावल होते हैं) की खुशबू भी हाथियों को अपनी ओर खींचती है।

मध्य प्रदेश में 65 जंगली हाथी सक्रिय हैं। इनमें से कान्हा टाइगर रिजर्व में घूम रहे सात हाथी अब पार्क से रिहायशी इलाकों में आ रहे हैं। जबकि बांधवगढ़ और सीधी के जंगल में हाथियों ने डेरा डाल रखा है। वैसे तो वे कोई नुकसान नहीं कर रहे हैं, पर महुआ व शराब और चावल की महक उन्हें जंगल से सटे गांवों में झोपड़ियों तक खींच लाती है और कई बार वे तोड़फोड़ कर देते हैं। इस स्थिति का बारीकी से अध्ययन करने के बाद विभाग ने शराब और चावल की महक पर पाबंदी लगा दी है। वन अधि‍कारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे महुआ की शराब और चावल खुले में न रखें। उन्हें इस तरह से रखें कि उनकी महक बाहर न आए।

पोस्टर भी चस्पा कराए

विभाग ने इसकी न सिर्फ मुनादी कराई है, बल्कि पोस्टर भी जारी किए हैं। जिसमें क्षेत्र में हाथी आने पर क्या करें और क्या न करें, का उल्लेख किया गया है। वहीं स्थानीय वन कर्मचारी भी ग्रामों के भ्रमण के दौरान लोगों को चेतावनी देते हैं। ग्रामीणों को हाथियों के आने की सूचना पहले से दे दी जाती है, ताकि उन्हें आकर्षित करने वाली वस्तुओं को ग्रामीण सुरक्षित तरीके से रख दें।

संजय दुबरी टाइगर रिजर्व सीधी के संचालक वायपी सिंह बताते हैं कि हाथियों को धान और महुआ पसंद है। यही कारण है कि इसकी खुशबू आते ही उस दिशा में दौड़ लगा देते हैं। इसलिए ग्रामीणों को सतर्क रहने को कहा जा रहा है। पार्क और आसपास नौ हाथी सक्रिय हैं। उनकी एक टीम लगातार निगरानी करती है। वे जिस दिशा में निकलते हैं, तुरंत उस क्षेत्र के लोगों को आगाह कर दिया जाता है।

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