मां आदिशक्ति की भक्ति में लीन हुआ शहर

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आदिशक्ति मां जगत जननी की उपासना और भक्ति का पर्व शारदेय नवरात्र जिले में बड़े ही धूमधाम के साथ श्रद्धाभाव से मनाया जा रहा है। सोमवार को महा अष्टमी पर महागौरी की पूजा अर्चना किया गया। अष्टमी होने के चलते सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समितियो द्वारा हवन पूजन भी कराया गया तथा कुछ जगहों में महाप्रसाद वितरण का आयोजन किया गया जिसमें सैकड़ों की संख्या में लोगों ने शामिल होकर महाप्रसाद ग्रहण किया।

आपको बताये कि पंचमी के दिन बंगाली दुर्गा की स्थापना की जाती है इस वर्ष भी जटाशंकर त्रिवेदी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के समीप नवीन स्कूल परिसर में मातारानी की स्थापना की गई है, जिसमे रोजाना ही दर्शन लाभ लेने के लिए हजारों की संख्या में भक्तगण पहुंच रहे हैं और मातारानी का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। बंगाली दुर्गा की स्थापना के दिन से ही शहर में भीड़ बढ़ना शुरू हो जाती है शाम होते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तगण शहर में विराजित मातारानी का दर्शन करने के लिए उमड़ पड़ते हैं पूरे शहर में विभिन्न मार्गों पर हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ देखी जा रही है।

ज्ञात हो कि विभिन्न दुर्गा उत्सव समितियो द्वारा महाप्रसाद का वितरण करने के साथ ही धार्मिक आयोजन भी कराए जा रहे हैं जिसका आनंद श्रद्धालु भक्तजनों द्वारा उठाया जा रहा है। जिस प्रकार से विगत दो-तीन दिनों से शहर के प्रमुख मार्गों में भक्तों की भीड़ देखी जा रही है, उसको देखते हुए प्रशासन द्वारा बड़े वाहनों के आवागमन के लिए मार्ग डायवर्ट कर दिया गया है और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों द्वारा स्वयं तैनात रहकर मॉनिटरिंग की जा रही है।

बंगाली समाज द्वारा स्थापित की गई मातारानी की विशेष पूजा की गई। महा अष्टमी के अवसर पर यहां शाम 4 बजे से सिद्धि पूजा की गई वही दोपहर में महाप्रसाद वितरण का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने शामिल होकर मां के आशीर्वाद के रूप में महाप्रसाद ग्रहण किया।

यही नही नवरात्र की शुरुआत से ही पूरा जिला भक्ति में नजर आ रहा है लोगों द्वारा पूरे 9 दिनों तक उपवास रखा जाता है और मातारानी की आराधना की जाती है। वही इस पर्व में कन्या पूजन एवं नौ कन्याओं को भोज कराने का भी विशेष महत्व रहता है इसलिए कन्याओं को बुलाकर कन्या भोज कराए जाने का क्रम पिछले 2 दिनों से लगातार जारी है।

आपको पताये कि नवमी के दिन से ही जवारो और ज्योति कलशों का विसर्जन प्रारंभ हो जाता है श्रद्धालु भक्तों द्वारा मंदिरों एवं घरों में जवारे स्थापित किए जाते हैं और उनकी 9 दिनों तक पूजा आराधना करने के बाद नौवें दिन पूरे भक्तिभाव के साथ विसर्जन किया जाता है। वही दशहरे के दिन से मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन का दौर भी प्रारंभ हो जाता है इसको देखते हुए स्थानीय प्रशासन द्वारा नगर के विभिन्न जगहों में विसर्जन कुंड तैयार किए गए हैं ताकि नगर की जनता को जवारे, ज्योति कलश एवं प्रतिमा विसर्जन के लिए परेशान न होना पड़े।

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