मारपीट के 3 आरोपियों को न्यायालय उठने तक का कारावास

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वारासिवनी न्यायालय के विद्वान न्यायाधीश न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्रीमति प्रीति चैतन्य चौबे में मारपीट के तीन आरोपी दुर्गा, ओमप्रकाश, कमल को न्यायालय उठने तक का कारावास व 2-2 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित कर सजा सुनाई गयी। प्राप्त जानकारी के अनुसार 01 दिसंबर 2017 को प्रार्थी आशीष चौधरी ने थाना वारासिवनी में उपस्थित होकर रिपोर्ट लेख करायी कि उक्त दिनांक के रात्रि 8 बजे वह अपनी दुकान बंद करके अपने घर जा रहा था। जैसे ही वह बिड़ी कारखाने के पास पहुंचा तो कमल रिछारिया, श्रीराम रिछारिया, दुर्गा रिछारिया, छक्कू रिछारिया ने उसे रास्ते में रोका और कहा कि उनके भाई के खिलाफ गवाही दोगे तो उसने कहा कि उसने कोई गवाही नहीं दी है तो उसने कहा कि तेरे भाई ने दिया है बोलते हुए मां बहन की गंदी-गंदी गालियां देने लगा। उसने गाली देने से मना किया तो चारों उसे लात घूसों से मारने लगे और छक्कू रिछारिया ने जेब से चाकू निकाला और उसके गर्दन पर रख दिया। चारों भाईयों ने उसे पकड़कर अपने घर कें अंदर घसीटकर ले गये और धमकी देने लगे कि अब वे लोग रिपोर्ट लिखाये तो उसे जान से खत्म कर देगें। तभी सामने खडे़ संजय ठाकरे और सुनील चैधरी , सुरेन्द्र, भोजेन्द्र, मुरली चौबे ने बीच बचाव के लिए आये तो छक्कू रिछारिया ने संजय ठाकरे के सिर पर ईंटा से मारा और कमल ने तलवार निकाला और संजय ठाकरे को मारा तो उसकी जैकेट फट गई थी। मारपीट के कारण उसे चेहरे , सिर, आंख के नीचे चोट आयी थी। संजय ठाकरे को भी सिर में चोंट एवं मुरली चौबे को ओंठ में चोंट आयी थी। उक्त सूचना के आधार पर अभियुक्तगण के विरूद्ध थाना वारासिवनी में अपराध पंजीबद्ध कर विवचेना में लिया गया। विवेचना के उपरंात अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया गया। जिसके बाद से उक्त प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन था जिसमें विद्वान न्यायाधीश श्रीमती प्रीति चैतन्य चौबे ने आरोपी दुर्गा उर्फ अभिषेक पिता नर्मदाप्रसाद रिछारिया उम्र 29 वर्ष, ओमप्रकाश उर्फ सेठी पिता नर्मदाप्रसाद रिछारिया उम्र 33 वर्ष, कमल पिता नर्मदाप्रसाद रिछारिया उम्र 40 वर्ष सभी निवासी वार्ड नं 14 वारासिवनी का दो सिद्ध होने पर उन्हें धारा- 323/34 (काउंट-4) भादवि के अंतर्गत न्यायालय उठने तक का कारावास एवं कुल 6000 रुपये के अर्थदण्ड से दंडित किया गया। अर्थदण्ड की राशि अदा न करने के व्यतिक्रम में अभियुक्तगण को 01-01 माह के सश्रम कारावास से दंडित किया जावेगा। अभियोजन की ओर से पैरवी राजेश कायस्त सहायक जिला अभियोजन अधिकारी वारासिवनी के द्वारा की गई।

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