
निराश्रित मवेशियों से परेशान कई गांव के किसानों का सब्र टूट गया और सैकड़ों मवेशियों को लेकर मुरैना शहर में आ गए। मवेशियों को कलेक्टर बंगले व पुरानी कलेक्ट्रेट में घुसाने का प्रयास किया। मवेशियों के बेकाबू झुंड ने कई वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया। करीब एक घंटे तक निराश्रित मवेशियों के झुंड के साथ शहर में अफरा-तफरी मचाने वाले ग्रामीण युवा पुलिस को देख भाग तो गए लेकिन, मवेशियों के झुंड को शहर में छोड़ गए। पुलिस का कहना है की इस तरह की हरकत करने वालें लोगों की को चिहिन्त कर चेतावनी दी जाएगी। दोबारा ऐसा करने पर कार्रवाई की जाएगी।
सोमवार की दोपहर 12 बजे के करीब दर्जनों युवा किसान लठ व डंडे लेकर मवेशियों को हांकते हुए जौरा रोड व बैरियर क्षेत्र होते हुए एमएस रोड पर आ गए। युवाओं ने पहले तो कलेक्टर बंगले में मवेशी घुसाने का प्रयास किया लेकिन दरवाजे बंद होने से वह ऐसा नहीं कर पाए। इसके बाद पुरानी कलेक्ट्रेट के बाहर सैकड़ों मवेशियों को हांक लाए, यहां पंचायत चुनाव के नामांकन के लिए भीड़ थी।
कर्मचारी व पुलिसकर्मियों ने मेंन गेट बंद कर दिया। पीछे से लठ बरसा रहे ग्रामीणों की मार से बचने के लिए ऐसी बेकाबू हुई कि वैरियर, जिला अस्पताल के सामने, नेहरू पार्क के पास, पुरानी कलेक्टोरेट के बाहर व ओवरब्रिज चौराहा पर कई ई-रिक्शा को चपेट में लेकर क्षतिग्रस्त कर दिया। पुलिसकर्मियों ने हालात देखकर मवेशी हांकने वाले युवाओं के मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू कर दिया, यह देखकर ग्रामीण युवा उल्ाटे पांव भागने लगे। वह सैकड़ों मवेशी के झुंड को शहर में ही छोड़ गए।
आक्रोशित ग्रामीण युवाओं का कहना था कि गांवों में गोशाला बनाई हैं उनमें इन मवेशियों को नहीं रखा जाता। शहर के मवेशियों को भी नगर पालिका के कर्मचारी गाड़ी में भरकर गांवों में बाहर छोड़ आते हैं। रात में झुंड बनकर मवेशी फसल को साफ कर देती है। ग्राम पंचायतों में कोई सुनवाई नहीं करता। अफसरों के बंगले में यह मवेशी घुसेंगी तब उन्हें समझ आएगा। समस्या का कोई निदान नहीं किया तो ऐसे ही मवेशियों को गांवों से लाकर शहर में छोड़ा करेंगे।









































