- राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने मोबाइल उपभोक्ताओं से जुड़े एक अहम मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों लोग रोजाना डेटा प्लान के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से नुकसान झेल रहे हैं। उन्होंने इस व्यवस्था को उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताया और इसमें बदलाव की जरूरत पर जोर दिया।
- हर दिन खत्म हो जाता है बचा हुआ डेटा
- सांसद ने बताया कि जब कोई व्यक्ति मोबाइल रिचार्ज कराता है, तो उसे हर दिन तय मात्रा में डेटा मिलता है, जैसे 1.5 जीबी, 2 जीबी या 3 जीबी, लेकिन यह डेटा रोजाना की सीमा में बंधा होता है और रात 12 बजे के बाद समाप्त हो जाता है। अगर यूजर उस दिन पूरा डेटा इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो बचा हुआ डेटा खत्म हो जाता है और अगले दिन में नहीं जुड़ता।
- पूरा पैसा देने के बाद भी पूरा लाभ क्यों नहीं
- राघव चड्ढा ने सवाल उठाया कि जब उपभोक्ता पूरे डेटा का भुगतान करता है, तो उसे उसका पूरा इस्तेमाल करने का अधिकार क्यों नहीं मिलता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति 20 लीटर पेट्रोल खरीदता है और केवल 15 लीटर ही इस्तेमाल करता है, तो बचा हुआ पेट्रोल उससे वापस नहीं लिया जाता। इसी तरह मोबाइल डेटा भी उपभोक्ता का अधिकार होना चाहिए।
- कंपनियों पर लगाए आरोप
- सांसद ने आरोप लगाया कि टेलीकॉम कंपनियां जानबूझकर रोजाना डेटा सीमा वाले प्लान को बढ़ावा देती हैं। उनका कहना है कि अगर मासिक डेटा सीमा वाले प्लान अधिक मिलें, तो उपभोक्ता अपनी जरूरत के अनुसार डेटा इस्तेमाल कर पाएंगे, जिससे कंपनियों का मुनाफा कम हो सकता है।
- इंटरनेट बन चुका है जरूरी हिस्सा
- उन्होंने कहा कि आज इंटरनेट केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। पढ़ाई, नौकरी, बैंकिंग और संचार जैसे हर क्षेत्र में इसकी जरूरत पड़ती है। ऐसे में हर दिन बड़ी मात्रा में डेटा का बिना इस्तेमाल खत्म हो जाना एक गंभीर चिंता का विषय है।
- तीन बड़े सुझाव रखे
- राघव चड्ढा ने इस समस्या के समाधान के लिए तीन प्रमुख सुझाव दिए। पहला, बचा हुआ डेटा अगले दिन में जोड़ने की सुविधा दी जाए। दूसरा, महीने के अंत में बचा डेटा अगले रिचार्ज में एडजस्ट किया जाए। तीसरा, बचा हुआ डेटा एक डिजिटल संपत्ति की तरह माना जाए और उसे दूसरे लोगों को भेजने की अनुमति दी जाए।
- सरकार से कार्रवाई की मांग
- सांसद ने कहा कि यह मुद्दा केवल डेटा का नहीं, बल्कि उपभोक्ता अधिकार और डिजिटल न्याय से जुड़ा है। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि मोबाइल उपयोगकर्ताओं को उनका पूरा अधिकार मिल सके।











































