जिला चिकित्सालय के पीछे लाखों की लागत से गेट का निर्माण किया गया है एवम अधिकारियों द्वारा इसे हर दिन लगाने के निर्देश भी दिये गए हैं। पर रात्रि में हर दिन गेट खुला ही रहता है इसी कारण यहा चोरी जैसी वारदात होती रहती है
आपको बता दें कि जिला चिकित्सालय में जिस प्रकार से चोरी जैसी घटनाएं बढ़ रही थी जिसको लेकर के जिला चिकित्सालय में सीसीटीवी कैमरे के साथ-साथ, चिकित्सालय के पीछे गेट का निर्माण भी कराया गया है जिसके कारण रात्रि में कोई भी पीछे के रास्ते हॉस्पिटल में ना आसके
और देखा जाये तो चिकित्सालय की दवाइयों का स्टोर रूम भी वही से संचालित होता है और कोरोना के समय में बनाया गया ऑक्सीजन प्लांट भी वहीं से संचालित होता है जिसको देखते हुए वहां पर त्वरित गेट का निर्माण किया गया था
जबकि रात्रि में उस इस तरफ कोई भी सुरक्षाकर्मी नहीं रहता, यदि बात करें पुलिस चौकी की तो इस ओर पुलिस बल भी नहीं लगता है जबकि सामने गेट पर सुरक्षाकर्मियों के साथ-साथ पुलिस चौकी भी संचालित होती है
किंतु पीछे के हिस्से में कोई सुरक्षा को लेकर के किसी प्रकार के कोई साधन इस ओर नहीं है इसलिए जिला चिकित्सालय प्रबंधन द्वारा यह निर्धारित किया गया था कि शाम होते ही पीछे गेट को लगा दिया जाएगा किंतु वर्तमान समय में ऐसा नहीं होता और रात्रि में यह गेट खुले होने से चोरी की संभावनाएं बनी रहती है एवं पीछे असामाजिक तत्वों का बोलबाला रहता है
प्रतिदिन गेट में ताला लगता है – सर्जन संजय दबड़गांव
जब इस संबंध में हमारे द्वारा सिविल सर्जन संजय दबड़गांव से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि जब गेट का निर्माण हुआ था तभी गेट में ताला लगाने के निर्देश जिला चिकित्सालय प्रबंधन द्वारा दे दिए गए हैं एवं प्रतिदिन गेट में ताला लगता है जबकि सिविल सर्जन को भी नहीं पता है कि उनके आदेश का कितना पालन हो रहा है








































