ग्राम पंचायत रामपायली अंर्तगत होने वाले श्रीराम बालाजी मेले का आयोजन बीते दिवस प्रारंभ हो गया है जो १४ नवंबर तक चलेगा। इसके बाद भी मेलें का आयोजन कुछ दिवस तक जारी रहेगा। लेकिन इस मेले का संचालन जनपद पंचायत न कराते हुये स्थानीय लोग ग्राम पंचायत के मार्फत करते है। मेले के दौरान काफी सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। यह सभी कार्यक्रम जनपद पंचायत वारासिवनी के द्वारा करवाये जाते है क्योंकि यह मेला का आयोजन शासकीय तौर पर किया जाता है जो जनपद पंचायत के अधीन होता है। ८ नवंबर से प्रारंभ हुये इस मेले में नगर, क्षेत्र व महाराष्ट्र की जनता काफी संख्या में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा रही है। मेले में पुलिस की अस्थाई चौकी, अस्थाई स्वास्थ जॉच शिविर व अन्य सुविधाओं की व्यवस्था भी बनाई गई है। वही मेला कौमी एकता का संदेश देते हुये भी प्रतीत हो रहा है जहां मुस्लिम समाज के आशिक अली भगवान के आकर्षक कपड़े बनाकर दे रहे है तो हिंदू संगठन के लोग भी अपनी और से मेले में आने वाले लोगों को खाने व अन्य सुविधा प्रदान कर रहे है। जिससे मेले का माहौल काफी कौमी एकता का संदेश दे रहा है।
पुजारी परमेश्वर दास वैष्णव ने पद्मेश से चर्चा में बताया कि तीन चार पीड़ी हमारे द्वारा इस मंदिर की सेवा की जा रही है। लोगों की इस मंदिर में अटूट आस्था है लोग मनोकामना पूर्ण होने पर लोग कढ़ाई लेकर आते है। पकवान बनाकर श्री बाला जी मंदिर में भगवान को भोग लगा रहे है। यह स्थित मूर्तिया प्राचीन मूर्तिया है जब भगवान श्रीराम यह से गुजरे थे तो वो यहां स्थित श्रृभंग रिषी के आश्रम में उनसे मिलने पहुॅचे थे। यहां भगवान श्री राम बालाजी की प्रतिमा समीप स्थित चंदन नदी से आदि महंत सालिक राम दास वैष्णव को प्राप्त हुई थी और जो साथ ही शंकर भगवान की पींडी उत्पन्न हुई एवं लंगड़ा हनुमान की प्रतिमा भी स्वयं उत्पन्न हुई है। यह काफी सिध्द क्षेत्र है। १६ सौ इसवी में यह प्रतिमा प्राप्त हुई थी। तब से हमारा परिवार उनकी सेवा कर रहा है।
इसी तरह कढ़ाई लेकर आये परमानंद पटले किन्ही महाराष्ट्र निवासी ने पद्मेश को बताया की वे किसी मान्यता के पूर्ण होने पर यहां हर वर्ष आ रहे है। हमारी श्रीराम बालाजी मंदिर रामपायली मंदिर में काफी अटूट आस्था है। मंदिर में किसी प्रकार का संकल्प लेने के बाद अगर वो मान्यता पूरी हो जाती है तो भक्तगण कढ़ाई लेकर आते है और भगवान को भोग चढ़ाते है। हम लोग भी किसी मान्यता के पूर्ण होने पर यहां आये है और प्रतिवर्ष ही आयेंगे।
यहां यह बताना लाजमी है कि रामपायली स्थित श्री राम बालाजी मेलें में भगवान के कपड़े सीलने का कार्य आशिक अली द्वारा पीड़ी दर पीड़ी किया जा रहा है। पद्मेश को जानकारी देते हुये श्री आशिक अली ने बताया की हमारा परिवार ३ सौ वर्षो से भी कुछ ज्यादा समय से भगवान श्रीराम बालाजी, माता सीता, लक्ष्मण व भगवान हनुमान के साथ ही विठ्ठल रूकमणी के कपड़े सीलने का कार्य कर रहे है। भगवान बाला जी रामपायली सहित पूरे क्षेत्र के महाराज है। उनकी ही कृपा दृष्टि से आज क्षेत्र में अमन और शांति है। आगामी समय में यह कार्य उनका पुत्र करेगा। श्री अली ने बताया की प्रशासन की और से तहसीलदार साहब को कपड़ा उपलब्ध कराये जाने के निर्देश है इस बार भी हमे समय पर कपड़े बनाने के लिये कपड़ा उपलब्ध हो गये थे। रामपायली नगरी हमारी धर्ममयी नगरी है जहां सभी संप्रदाय के लोग मिल जुलकर रहते हे।
जनपद पंचायत वारासिवनी से नियुक्त किये गये मेला प्रभारी मनोज चौरे ने पद्मेश को जानकारी देते हुये बताया की मेले में व्यवस्था काफी अच्छी है। किसी प्रकार की को असुविधा मेले में आने वाले लोगों को नही हो रही है। एक तरफ हमने अस्थाई पुलिस चौकी बनाई है तो दूसरी तरफ किसी का अगर स्वास्थ खराब हो जाये तो उसके लिये भी अस्थाई अस्पताल बनाया है। एक से बढ़कर एक कार्यक्रम का जनपद पंचायत द्वारा आयोजन किया जा रहा है। हम १४ नवंबर तक ही मेले को चलायेंगे इसके बाद भी तीन चार दिन यह मेला चलता है क्योंकि यह धार्मिक नगरी है जहां लोग कढ़ाई लेकर आते है उनकी श्रृध्दा के कारण प्रशासन भी उन्हे रोक नही सकता। श्री चौरे ने बताया की किसी अप्रिय घटना किसी मेला दर्शन करने आये श्रृध्दालु भक्त के साथ न हो इसके लिये भी जनपद पंचायत ने करीब आधा दर्जन जगह पर सीसी टीव्ही कैमरे लगाये है।










































