अध्ययन में दावा किया गया है कि विभिन्न वायु प्रदूषणकारी तत्वों के संपर्क में आने से कोरोना रोगियों के अस्पताल में भर्ती होने का खतरा 30 प्रतिशत तक बढ़ता है, इससे वह लोग भी नहीं बच सकते, जिनका पूर्ण टीकाकरण हो चुका है। इन प्रदूषणकारी तत्वों में पीएम 2.5 और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड अहम हैं। शोधकर्ताओं सहित टीम ने एक अस्पताल में मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड का अध्ययन किया। अध्ययन के अनुसार 2021 के जुलाई या अगस्त में कोविड के 50,010 रोगियों की पहचान हुई हैं, जिनकी आयु 12 वर्ष और उससे अधिक थी। उस समय सार्स-सीओवी-2 के डेल्टा स्वरूप से अधिक लोग संक्रमित हो रहे थे वहीं कई लोगों को टीके लगाए गए थे।
शोधकर्ता ने कहा कि ये निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे दिखाते हैं कि कोविड टीके अस्पताल में भर्ती होने के खतरे को कम करने में सफल होते हैं। लेकिन जिन लोगों को टीके लग चुके हैं और वे भी प्रदूषित हवा के संपर्क में आते हैं, तब उसमें रोग की गंभीरता बढ़ने का अधिक खतरा है।










































