वारासिवनी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत वारा स्थित ग्राम वारा से गायत्री मंदिर मार्ग की हालत खस्ताहाल हो गई है। जहां पर पैदल चलना भी अब दुर्बर होता जा रहा है यह मार्ग पूरा कीचड़ से सना हुआ है जिसके कारण दुर्घटना घटित होने की संभावना बनी हुई है। ज्ञात हो कि यह मार्ग लालबर्रा रोड से बालाघाट को जोड़ने वाला बायपास मार्ग है जिसकी दूरी कम है अन्यथा लोगों को 4 किलोमीटर घूम कर आना होता है। ऐसे में लालबर्रा रोड से बालाघाट रोड और बालाघाट रोड से लालबर्रा रोड की ओर जाने वाले लोग इसी मार्ग का चयन करते हैं। जहाँ पर बारिश के कारण गड्ढों में पानी भर गया है रोड पर मिट्टी कीचड़ बन गई है जहां पर वाहन स्लिप होने लगे है फिर भी करीब का बायपास होने से लोग उसी मार्ग का चयन कर रहे हैं। जबकि ग्रामीणों के द्वारा लंबे समय से मार्ग के निर्माण को लेकर मांग की जा रही है किंतु जिस पर वर्तमान तक कोई गंभीर रूप से ध्यान नहीं दिया गया है जब कि यह मार्ग बहुत ज्यादा खराब हो चुका है। यह कच्चा मार्ग है जिसका पंचायत द्वारा ना ग्रेवल रोड कराई गई है और ना ही डामरीकरण के लिए कार्य किया गया है जिससे स्थिति यथावत बनी हुई है जिसे देखते हुए ग्रामीणों एवं राहगीरों के द्वारा मार्ग के निर्माण किए जाने की मांग की जा रही है।
यातायात का इस मार्ग पर रहता है दबाव
वारासिवनी क्षेत्र का सीएम राइस स्कूल बालाघाट मार्ग पर स्थित है जहां पर वारासिवनी के आसपास ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में छात्र छात्रा शिक्षा अध्ययन करने के लिए आते हैं। ऐसे ही लालबर्रा रोड स्थित नेवरगांव मुरझड़ पाथरी चिल्लौद सहित अनेक ग्राम के ग्रामीण लालबर्रा रोड से इस बायपास मार्ग का उपयोग कर बालाघाट रोड पर पहुंचते हैं जहां से उन्हें स्कूल नजदीक पड़ता है। परंतु मार्ग का निर्माण ना होने के कारण इन्हें समस्या का सामना करना पड़ता है और कई बार कीचड़ में गिर जाने के कारण घर वापस भी जाना पड़ता है। ऐसे ही लालबर्रा रोड से बालाघाट जाने के लिए और बालाघाट से आ रहे लोग लालबर्रा रोड स्थित ग्राम मैं जाने के लिए भी इस मार्ग का चयन करते हैं मार्ग पर कीचड़ के कारण उनके वाहन स्लिप हो जाते हैं जिससे वह चोटिल के साथ-साथ कपड़े भी गंदे होते हैं। ऐसे में यातायात का भारी दबाव यहां बना होता है।
ग्रामीण गीता कटरे ने पदमेश से चर्चा में बताया कि इस मार्ग को लेकर कई बार शिकायत की गई है परंतु हर बार आश्वासन देते हैं पर इसे नहीं बनाया जा रहा है जिससे ऐसा लगता है कि उन्हें ऐसी ही रोड अच्छी लग रही होगी। यहां से सीएम राज स्कूल के बच्चे 5 से 6 गांव के रोजाना आते जाते हैं ऐसे में वह गिरने से उनकी कॉपी पुस्तक खराब होती है कपड़े खराब हो जाते हैं यह स्थिति पिछले 10 वर्षों से मेरे द्वारा देखी जा रही है। श्रीमती कटरे ने बताया कि कोई कहता है कि यह मार्ग नगरपालिका का है कोई कहता है पंचायत का है पर स्पष्ट नहीं है कभी सुनने मिलता है किस रोड पर राजनीति हो रही है क्योंकि आगे कुछ लोगों की जमीन और मकान आ रहे हैं ऐसे में कुछ भी हो सरकार को नाप कर रोड बनानी चाहिए। क्योंकि यह करीब का मार्ग है वरना लोगों को दूरी तय करना पड़ता है।
ग्रामीण पर्वता हरिनखेडे ने बताया कि यह कच्चा मार्ग है जिस पर कुछ वर्षों से मुरम भी नहीं बिछाया गया है और ना ही कोई कार्य किया गया है जिसके कारण बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं गिट्टी बाहर आ गई है जहां बरसात में कीचड़ और गड्ढों में पानी भरा पड़ा है। यहां से ट्रक ट्रेक्टर सभी प्रकार के वाहन आना-जाना करते हैं जिसके कारण लोग गिरते रहते हैं मुख्य रूप से यहां से स्कूल के बच्चे और किसान सहित ग्रामीण मार्ग का उपयोग करते हैं। श्रीमती हरिनखेडे ने बताया कि इस मार्ग को लेकर अनेकों बार शिकायत की गई है आंदोलन भी किया गया है पर कोई नतीजा नहीं निकल पा रहा है। अब पता नहीं किन कारणों से इस मार्ग का निर्माण नहीं कराया जा रहा है।
राहगीर साहिल गौतम ने बताया कि वह मछली फार्म रहते हैं और रोजाना यहां से आना-जाना करते हैं। मार्ग में बहुत गड्ढे हो गए हैं और गाड़ियां कीचड़ के कारण स्लिप हो रही है अभी उनकी भी गाड़ी अनियंत्रित हो गई थी परंतु बच गई इस प्रकार से हादसे होते रहते हैं डबल कोई व्यक्ति मोटरसाइकिल से जाता है तब अधिकतर हादसे होते हैं। श्री गौतम ने बताया कि यह 1 किलोमीटर का मार्ग है जिससे लालबर्रा रोड से बालाघाट रोड व्यक्ति पहुंच जाता है वरना वारासिवनी घूमते हुए 4 किलोमीटर का फेर पड़ता है। इसलिए अधिकांश लोग इसी मार्ग का चयन करते हैं जिसे बनाया जाना चाहिये।
पुनाराम कोल्ते ने बताया कि यह मार्ग ग्राम वारा से गायत्री मंदिर तक का है जो लालबर्रा रोड और बालाघाट रोड को जोड़ता है। वर्तमान में वह अपने खेत जा रहे हैं उनके जैसे अनेकों किसानों की किसानी इसी रोड पर है परंतु इसका अभी तक मार्ग का निर्माण नहीं हुआ है पहले टेंडर लगा था रोड का परंतु अभी दोबारा लगाया गया है जिससे लग रहा है कि जल्द निर्माण होगा। परंतु 10 से 15 साल हो गए इस पर मुरम नहीं किया गया है। श्री कोल्ते ने बताया कि इस मार्ग का डामरीकरण किया जाना चाहिए ताकि लोग अच्छे से आवागमन करें यह बायपास मार्ग हैं बड़ी संख्या में लोग आना-जाना करते रहते हैं जहां अभी वर्तमान स्थिति में दुर्घटना होने की संभावना बनी हुई है।
इनका कहना है
दूरभाष पर चर्चा में बताया कि वारा से गायत्री मंदिर मार्ग का टेंडर शासन के द्वारा लगाया गया था जो टेंडर किसी ठेकेदार को दिए जाने की बात कहीं जा रही है। जिसमें संबंधित ठेकेदार से मुलाकात कर मार्ग का जल्द निर्माण करने व वैकल्पिक व्यवस्था बनाए जाने के लिए कहां जायेगा।










































