विश्व की अन्य भाषाओं में निहित ज्ञान का भी लाभ लें: उच्च शिक्षा मंत्री डॉ यादव

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उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भाषाओं का गुलदस्ता मनुष्य के जन्म के साथ चलता रहता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में अन्य भाषाओं में ज्ञान से भी लाभ प्राप्त किया जाना चाहिए। डॉ. यादव आज बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में रूसा प्रोजेक्ट में स्थापित लैंग्वेज लेब और ज्ञान-विज्ञान भवन के उन्नयन कार्य के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि भाषा प्रयोगशाला का उपयोग कर विद्यार्थी अंग्रेजी की दासता से बाहर निकल सकते है और अन्य भारतीय भाषाओं को सहजने की दिशा में भी ठोस कदम उठा सकते है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने के साथ आवश्यकता इस बात की भी है कि अन्य भाषाओं में उपलब्ध ज्ञान से लाभ प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत ज्ञान के दायरे को बढ़ाकर धर्म ग्रंथ को भी शामिल किया गया और गीता, रामायण को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया।
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में पिछले 2 वर्षों में विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों के अधोसंरचना विकास को लेकर व्यापक कार्य किया गया है। विश्वविद्यालयों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किये गए।
समारोह की विशेष अतिथि विधायक श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि भाषा प्रयोगशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को नई सुविधा प्राप्त होगी। वे अन्य भाषाओं में भी दक्ष हो सकेंगे। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरजे राव ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कार्यक्रम में एमआईसी सदस्य जीतेन्द्र शुक्ला भी उपस्थित थे। कुलसचिव डॉ. आईके मंसूरी ने आभार व्यक्त किया।

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