जिला शिवपुरी में अधिवक्ता की हत्या की घटना के विरोध में जिला अधिवक्ता संघ बालाघाट ने अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट लागू किए जाने की मांग को लेकर एकदिवसीय विरोध प्रदर्शन किया। विरोध स्वरूप अधिवक्ताओं ने पूरे दिन न्यायालयीन कार्य का बहिष्कार किया और न्यायालय में कोई कार्य नहीं किया। दोपहर लगभग 3 बजे अधिवक्ता रैली के रूप में कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने का प्रयास किया। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि वे ज्ञापन किसी अन्य अधिकारी को नहीं, बल्कि स्वयं कलेक्टर को ही सौंपेंगे। इसी मांग को लेकर अधिवक्ता करीब 45 मिनट तक कलेक्टर कार्यालय परिसर के गेट के सामने धरने पर बैठ गए और प्रदर्शन किया। बाद में कलेक्टर बालाघाट के पहुंचने पर उन्हें ज्ञापन सौंपा गया।
शिवपुरी जिला के करेरा में अधिवक्ता संजय कुमार सक्सेना की 14 फरवरी को गोली मारकर की गई हत्या के विरोध में प्रदेशभर के अधिवक्ताओं में रोष व्याप्त है। घटना के बाद राज्य अधिवक्ता संघ जबलपुर द्वारा 15 फरवरी को विशेष आपातकालीन बैठक आयोजित की गई, जिसमें 16 फरवरी को मध्यप्रदेश के सभी अधिवक्ताओं द्वारा न्यायालयीन कार्य से विरत रहते हुए प्रतिवाद दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। इसी क्रम में जिला अधिवक्ता संघ बालाघाट ने भी 16 फरवरी को न्यायालयीन कार्य का पूर्ण बहिष्कार किया। सुबह 11 बजे न्यायालय परिसर में सभी अधिवक्ता एकत्रित हुए, जहां शिवपुरी की घटना की जानकारी साझा की गई। अधिवक्ताओं ने अपने-अपने पक्षकारों को विरोध स्वरूप कार्य न किए जाने की सूचना दी, जिसके बाद अधिकांश पक्षकार वापस लौट गए। दोपहर 3 बजे जिला अधिवक्ता संघ के सदस्य पैदल रैली निकालते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। उन्होंने कलेक्टर बालाघाट मृणाल मीना को ज्ञापन सौंपने की मांग की। उस समय कलेक्टर के कार्यालय में उपस्थित न होने पर अधिवक्ताओं ने लगभग 45 मिनट तक कलेक्टर कार्यालय परिसर के अंदर गेट के सामने बैठकर प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। बाद में कलेक्टर के पहुंचने पर उन्हें ज्ञापन सौंपा गया। जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष प्रवेश मलेवार ने बताया कि यह प्रदर्शन शिवपुरी की घटना के विरोध के साथ-साथ अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग को लेकर किया गया है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता लंबे समय से इस कानून की मांग कर रहे हैं, किंतु अब तक सरकार द्वारा इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं पर बढ़ते हमलों को देखते हुए सरकार को शीघ्र अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट लागू करना चाहिए। जब तक यह कानून लागू नहीं होता, तब तक संघ आंदोलन और ज्ञापन के माध्यम से अपनी आवाज उठाता रहेगा। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे और एकजुटता का परिचय दिया।










































