नई दिल्लीः याद कीजिए कुछ महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक खास आदेश जारी किया था। वह मामला था दलित छात्र अतुल कुमार का। अतुल को IIT धनबाद में एडमिशन चाहिए था। लेकिन, वह फीस भरने की आखिरी तारीख तक पैसे नहीं जमा कर पाए। उनकी फैमिली की माली हालत ठीक नहीं थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह गलत होगा कि एक टैलेंटेड स्टूडेंट को सिर्फ पैसों की वजह से एडमिशन न मिले। खासकर जब वह एक गरीब परिवार से हो। इसलिए कोर्ट ने IIT धनबाद को आदेश दिया कि अतुल कुमार के लिए एक एक्स्ट्रा सीट बनाई जाए। इससे अतुल को उनके मनपसंद कोर्स में एडमिशन मिल सकेगा। शीर्ष कोर्ट ने माना कि ऐसा करना ‘पूरी तरह से न्याय’ करने के लिए जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में जिस ‘पूरी तरह से न्याय’ शब्द का प्रयोग किया वह आर्टिकल 142 का अहम हिस्सा है। संविधान का यह अनुच्छेद सुप्रीम कोर्ट को अपने समक्ष किसी भी मामले में ‘पूर्ण न्याय’ सुनिश्चित करने के लिए आदेश जारी करने की शक्ति देता है। इस शक्ति को शीर्ष कोर्ट की ‘पूर्ण शक्ति’ के रूप में भी जाना जाता है, और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इसी आर्टिकल 142 का हवाला देते हुए न्यायपालिका की भूमिका पर तल्ख टिप्पणी की है। यही नहीं, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को संविधान के अनुच्छेद 142 से मिली शक्ति को ‘न्यूक्लियर मिसाइल’ करार दिया।










































