सामुदायिक स्वास्थ केंद्र कटंगी के डॉक्टर हिंदी में लिख रहे दवाई की पर्ची

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प्रदेश में हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए शासन द्वारा मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई अब अंग्रेजी के साथ साथ हिंदी भाषा में भी उपलब्ध करा दी गई है। जहां नीट की परीक्षा उत्तीर्ण कर विद्यार्थी अब हिंदी पाठ्यक्रम से पढ़ाई कर चिकित्सक बनने का सपना पूरा कर सकेंगे ।जहां 16 अक्टूबर को मेडिकल पढ़ाई की हिंदी पाठ्य पुस्तक का विमोचन भी कर दिया गया है। वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने मेडिकल पढ़ाई की हिंदी पाठ्य पुस्तक का विमोचन करते हुए चिकित्सकों से अंग्रेजी की जगह हिंदी में दवाई की पर्ची लिखने की भी अपील की थी। जिसका असर अब प्रदेश के बालाघाट जिले में भी देखने को मिल रहा है। जहां जिले के कटंगी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ 2 चिकित्सकों ने ना सिर्फ अपनी प्रैक्टिस हिंदी से शुरू कर दी है ,बल्कि अब दोनों ही चिकित्सकों ने हिंदी में अपना लेटर पैड भी छपवा कर हिंदी में ही दवाई लिखना शुरू कर दिया है।यहां बीएमओ डा. पंकज दुबे, डा. नवीन लिल्हारे द्वारा हिंदी में मरीजों को दवाओं के नाम पर्ची पर लिखकर दे रहे है।
दरअसल, प्रदेश सरकार द्वारा हिंदी को बढ़ावा देने के लिए प्रयास किए जा रहे है।इंजीनियरिंग, मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में कराने वाला पहला राज्य बन गया है।इससे डा. नवीन लिल्हारे एवं डा. पंकज दुबे द्वारा हिंदी में दवाई का पर्चा लिखना शुरू कर दिया है।इससे अब मरीजों को भी दवा लेने में सहूलियत होगी।

चिकित्सकों ने हिंदी में लिखी दवाई
बताया जा रहा है 17 अक्टूबर को मरीज गौर्य मर्सकोले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कटंगी में इलाज कराने आए थे।मरीज को कान में दर्द था।मरीज का चेकअप कर हिंदी में दवा की पर्ची लिखा है। इसी तरह सेवाधाम के डा. नवीन लिल्हारे द्वारा मरीज सरिता चौरसिया को हिंदी में पिर्ची लिखकर दवाइयां लाने के लिए कहा।मरीज ने हिंदी में पर्ची देख मेडिकल जाकर दवा लेकर आई और डाक्टर से चेक कराई।

हमेशा के लिए हिंदी में दवा की पर्ची लिखना शुरू कर दिया है _ डा. पंकज दुबे
दूरभाष पर की गई चर्चा के दौरान डा. पंकज दुबे ने बताया कि हिंदी में मेडिकल कालेज की पढ़ाई करवाने देश में मध्य प्रदेश पहला राज्य बन गया है। इसलिए हमने 17 अक्टूबर से हमेशा के लिए हिंदी में मरीजों के लिए दवा की पर्ची लिखना प्रारंभ कर दिया है। इतना ही नहीं उन्होंने अपना दवा की पर्ची लिखने वाला लेटर पैड को भी हिंदी में तैयार किया है।उन्होंने बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अंग्रेजी दवा को हिंदी में क्यों नहीं लिख सकते कहा।उसके बाद उसे आत्मसात करते हुए अपने अंग्रेजी वाले लेटर पैड को हिंदी में बनाकर हिंदी में मरीजों को दवा लिखकर दे रहे है

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