आदिवासी बालिकाओं के साथ घटी दुष्कर्म की घटना में पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 15 दिनों के भीतर 40 पेज का चालान न्यायालय में पेश कर दिया है। साथ ही डे-टू-डे हियरिंग किए जाने को लेकर भी पुलिस ने न्यायालय को पत्र लिखा है और पुनः पीड़ित बालिकाओं को 8 लाख 25 हजार रूपये की दूसरी बार आर्थिक सहायता राशि दी है। जबकि इसके पहले पीड़ितों को 16 लाख 50 हजार रूपये की आर्थिक सहायता राशि दी जा चुकी है ।
आपको बता दे कि हट्टा थाना क्षेत्र में आदिवासी तीन नाबालिग और एक बालिग, बालिकाओं से किए गए सामूहिक दुष्कर्म मामले में पुलिस ने मामले की जांच, पीड़िताओं के बयान और विभिन्न रिपोर्ट के साथ, न्यायालय में चालान पेश किया है। 15 दिन में 40 पेज के न्यायालय में चालान पेश करने के साथ ही पुलिस ने मामले में डे-टू-डे हियरिंग के लिए डिस्ट्रिक्ट जज को एक पत्र भी लिखा है। वहीं पीड़िताओं को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत एक बार फिर 8 लाख 25 हजार रूपए की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की गई है। इससे पूर्व पीड़िताओं को 16 लाख 50 हजार रुपये की राशि भी प्रदान की गई थी। यह घटना बीते 23 अप्रैल की रात, शादी से घर लौटते समय, चार आदिवासी बालिकाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया गया था। जिसमें घटना के दो दिनों तक मामले में गांव में ही पंचायत कर समझौता करवाने का प्रयास किया गया, लेकिन समझौता नहीं होने पर 25 अप्रैल को मामले में हट्टा थाना में एफआईआर दर्ज की गई थी। जिसमें पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जिसके आरोपी लोकेश मात्रे, लालचंद खरे, अजेन्द्र बाहे, अज्जु बगडते, राजेन्द्र कावरे, मानिराम बाहे और इंग्लेश मात्रे, वर्तमान मंे बालाघाट जेल में बंद है। रविवार को सीएसपी वैशालीसिंह कराहलिया ने बताया कि मामले की संपूर्ण विवेचना उपरांत, माननीय न्यायालय में चालान पेश किया गया है। साथ ही माननीय डीजे साहब को प्रकरण की डे-टू-डे सुनवाई के लिए एक पत्र भी लिखा गया है। इस मामले को लेकर आदिवासी समाज आंदोलित रहा। बीते 7 मई को ही आदिवासी समाज ने मुख्यालय में एक बड़ी न्याय जनाक्रोश रैली की थी। जिसमें बड़ी संख्या में जिले सहित अन्य जिलो के आदिवासी समाज के संगठन और प्रतिनिधियों ने आक्रोश जाहिर करते हुए आदिवासी बालिकाओं के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले में सरकार की खामोशी, पीड़िताओं को एक-एक करोड़ रूपए मुआवजा और आरोपियों को फांसी देने की आवाज बुलंद की थी। हालांकि पुलिस अधीक्षक नगेन्द्रसिंह ने घटना के तत्काल बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रेस से चर्चा में मामले को फास्टट्रेक कोर्ट में ले जाकर, जल्द से जल्द आरोपियों को सजा दिलाने की बात कही थी। यही कारण है कि पुलिस ने मामले की त्वरित विवेचना कर, चालान को न्यायालय में पेश कर दिया है।
इन धाराओं में पुलिस ने की कार्यवाहीं
हटटा पुलिस द्वारा दुष्कर्म मामले में धारा 70 (1) 70(2), 115(2) 351(3), 3(5), 190, 191(2), 61(2) BNS 5/6 पॉक्सो एक्ट 3(1)(w), 3(2)(V), 3(2)(Va) दर्ज किया गया था। साथ ही चालान प्रस्तुत होने के बाद जनजाति कार्य विभाग द्वारा इस प्रकरण में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम-1995 की अनुसूची के उपाबंध में वर्णित राहत राशि के मापदण्ड के पालन में जिला स्तरीय समिति द्वारा राशि जारी करने के लिए अनुमोदन प्रदान किया गया है। इसके बाद जनजातीय कार्य विभाग ने अत्याचार से पीडित कुल 04 (चार) पीडिताओं में से प्रत्येक को राशि रू. 2,06,250/- (रू.दो लाख छः हजार दो सौ पचास मात्र) कुल राशि रु. 8,25.000/- रुपये जारी करने के आदेश कर दिए गए है। ज्ञात हो कि इस मामले में पीडिताओं को पूर्व में कुल 16 लाख 50 हजार रुपये की राशि भी प्रदान की जा चुकी है।










































