विद्वान सत्र न्यायाधीश दिनेश चंद्र थपलियाल की अदालत में हत्या करने का प्रयास और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में आरोपी ,मीताराम पिता हरिलाल खरे 45 वर्ष ग्राम भवराटोला सेवती थाना किरनापुर निवासी को 7 एवं 2 वर्ष की सश्रम कारावास और7000 रुपए अर्थदंड से दंडित किए। इस आरोपी के विरुद्ध अपने गांव के जगतराम पांचे की कुल्हाड़ी से मारकर हत्या करने का प्रयास और जान से मारने की धमकी देने का आरोप था।
अभियोजन के अनुसार ग्राम सेवती के भवराटोला निवासी मीताराम खैर और जगतराम पांचे के बीच पूर्व से रंजिश बनी हुई थी। 11 फरवरी 2022 की शाम जगतराम पांचे अपने भांजे चन्द्रेश गांव के तिलकचंद मातरे के घर शादी मैं गए थे।। शाम 6.30 बजे दोनो तिलकचंद के घर के सामने मण्डप में कुर्सी बैठे थे और चंद्रेश अपने मामा जगतराम से बातचीत कर रहा था उसी समय गांव का मीताराम खरे अपने हाथ में कुल्हाड़ी लेकर आया और पुरानी रंजिश को लेकर जगतराम पांचे को गालियां देते हुए बोला कि तू मुझे आए दिन परेशान करते रहता है और मुझे जाति समाज से यह बाहर निकाल दिया है यह कह कर मीताराम खरे ने जगतराम पांचे के उपर कुल्हाड़ी से वार कर दिया। कुल्हाड़ी का वार जगतराम पांचे के दाहिने गाल पर लगा। चंद्रेश एवं गांव के लोग दौड़े भी बचाव किए तब मीताराम खरे ने जगतराम पांचे को बोला कि आज तो बच गया आज के बाद कहीं भी मिला तुझे जान से खत्म कर दूंगा, कहकर धमकी दिया और वहां से भाग गया। इस वारदात में गंभीर रूप से घायल जगतराम पांचे को शादी में आई हुई फोर व्हीलर से किरनापुर अस्पताल लाकर भर्ती किये। जहां से उसे जिला अस्पताल बालाघाट रिफर किया जहां से उसे बेहतर उपचार हेतु गोंदिया कर प्राइवेट अस्पताल में भर्ती किया गया था। इस मामले में चंद्रेश द्वारा की गई रिपोर्ट पर मीता राम खरे के विरुद्ध किरनापुर पुलिस थाने में धारा 294 324 307 506 भाग 2 भादवि के तहत अपराध दर्ज किया गया। इस अपराध में मिताराम खैरे को गिरफ्तार किया गया और विवेचना उपरांत अभियोग पत्र विद्वान अदालत में पेश किया गया था। यह मामला हाल ही में विद्वान सत्र न्यायाधीश दिनेशचंद थपलियाल की अदालत में चला। जहां पर अभियोजन पक्ष आरोपी मीताराम खरे के विरुद्ध धारा 307 और धारा 506 भादवी के तहत अपराध सिद्ध करने में सफल रहा। विद्वान अदालत ने मामले की समस्त परिस्थितियों को देखते हुए मीताराम खरे को धारा 307 भादवि के तहत अपराध में 7 वर्ष की सश्रम कारावास और 5000रुपये अर्थदंड, धारा 506 भाग 2 भादवि के तहत अपराध में 2 वर्ष का सश्रम कारावास और 2000 रुपये अर्थदंड से दंडित किये। इस मामले में शासन की ओर से लोक अभियोजक एम एम द्विवेदी द्वारा पैरवी की गई थी।










































