कोई भी मुद्दा हो, किसी भी क्षेत्र से जुड़ा हो। कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र का हो या व्यवस्थापिका के, ये एक ट्रेंड सा चल पड़ा है कि पीआईएल के नाम पर सीधे सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगा दी जा रही है। कई बार इस तरह के पीआईएल में पब्लिक का इंट्रेस्ट नहीं बल्कि पब्लिसिटी स्टंट का पुट ज्यादा होता है। सुप्रीम कोर्ट भी समय-समय पर ऐसी पीआईएल डालने वालों पर जुर्माना या कड़ी फटकार लगाता है। अब एक ताजा मामला देख लीजिए। अंधविश्वास खत्म करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर दी गई। शीर्ष अदालत ने ये कहते हुए कि उसके पास हर मर्ज की दवा नहीं है, याचिका को स्वीकर करने से इनकार कर दिया जिसके बाद याचिकाकर्ता ने उसे वापस ले ली।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में सरकार को अंधविश्वासों को खत्म करने के लिए कदम उठाने का निर्देश देने की मांग की गई थी। जजों ने कहा कि लोगों में वैज्ञानिक सोच कैसे विकसित की जाए, यह अदालत तय नहीं कर सकती।










































