ग्राम पंचायत सावंगी के जंगल में देर शाम जिस हिंसक प्राणी ने गाय का शिकार किया था वो बाघ है। इस बात की पुष्टि विभाग ने कर दी है। हालांकि जो घटना स्थल है उस स्थल पर जब वन अमला १३ दिसंबर की सुबह पहुॅचा तो देखा की गाय की सांसे चल रही है। जिसे तत्काल उपचार के लिये नगर स्थित गौशाला लाया गया जहां वेटनरी डॉक्टरों द्वारा उसका उपचार किया जा रहा है।
लगातार बना हुआ है हिंसक प्राणियों का मूवमेंट
गौरतलब है की लगातार वारासिवनी क्षेत्र में बाघ व तेंदुऐं की आमद होने से लोग सहमे हुये है। बीते दिवस तेंदुऐं ने जहां एक महिला कृषक को नांदगॉव में अपना शिकार बनाया था वही ५ दिन पूर्व बाघ ने झालीवाड़ा ग्राम पंचायत अंर्तगत आने वाले टोला में २ गाय का शिकार किया था। इसी तरह १२ दिसंबर को पुन: बाघ ने गाय को गंभीर रूप से घायल कर दिया है।
दो दिन से थी मेरी गाय लापता – अशोक कावरे
इस संबंध में पद्मेश को जानकारी देते हुये गाय मालिक अशोक कावरे ने बताया की उनका ग्राम धानीटोला है पास ही में सावंगी का जंगल लग जाता है। ऐसे में चरवाहा प्रतिदिन इसी तरफ गायों को चराने के लिये लाता है। ११ दिसंबर को उनकी गाय घर नही आयी। १२ दिसंबर को उन्होने चरवाहा सहित अन्य लोगो से पूछताछ की मगर कोई भी सही जानकारी नही दे पा रहा था। उनकी गाय गर्भवती थी। जिसने कल ही एक बछड़े को जन्म दिया है। १२ दिसंबर की शाम को उन्हे खबर लगी की किसी हिंसक प्राणी ने एक गाय का शिकार सावंगी के जंगल में किया है। जब वे पहुॅचे तो रात हो जाने के कारण वन विभाग ने उन्हे मौका स्थल पर जाने नही दिया। जब आज सुबह पहुॅचे तो उसकी सांसे चल रही थी। जिसे विभाग व ग्रामवासियों की मदद से उपचार के लिये गौशाला लाया गया है जहां उसका उपचार पशु चिकित्सकों द्वारा किया जा रहा है। श्री कावरे ने बताया की बाघ ने गाय की गर्दन व पीछे वाले हिस्से पर प्रहार किया है।
दहशत में काटी है रात – दुर्गश
इसी तरह सावंगी निवासी दुर्गेश सेन्द्रे ने पद्मेश को बताया की वे जंगल के समीप ही रहते है। बीते दिवस हुई इस घटना के बाद से हम लोग दहशत में है। हमारे परिवार ने घर के सामने बिजली लगाकर आग जलाकर रात काटी है। वन विभाग को इस तरह क्षेत्र में हो रही घटनाओं पर गंभीरता पूर्वक ध्यान देना चाहिये और पिंजरा लगाये जाने की कार्यवाही करनी चाहिये ताकि हिंसक प्राणीयों को पकड़कर आबादी क्षेत्र से दूर छोड़ा जा सके।
विभाग लगातार कर रहा गस्त – परिक्षेत्र अधिकारी
इस संबंध में वन विभाग के परियोजना परिक्षेत्र अधिकारी शिवभान नागेश्वर ने पद्मेश को बताया की उन्हे इस घटना की जानकारी १२ दिसंबर की शाम को लगी थी। मौके पर पहुॅचते तक अंधेरा हो चुका था। जिसके बाद हमने जंगल के कुछ हिस्से में सर्चिंग की मगर गाय नही मिली। जिसके बाद हमने तत्काल पटाखे फोड़े यह सिलसिला देर रात्री तक जारी रहा। सुबह जब हमने अपना तलाशी अभियान प्रारंभ किया तो गाय हमें प्राप्त हुई जिसकी सांसे चल रही थी। जिसे ट्रेक्टर से गौशाला लाकर वेटनरी डॉक्टरों से उपचार कराया जा रहा है। उन्होने बताया की गाय की गर्दन व पीछे वाला हिस्से को बाघ ने अपना निशाना बनाया है। पग मार्ग भी हमे प्राप्त हो गये है। हमारा अलर्ट अभियान अभी भी जारी है। हमारी टीम सावंगी के जगल से लगे तालाब व आसपास के ग्रामो में मौजूद है।










































