हितग्राही के खेत में गड्ढा तक नहीं खुदा,उधर कागजों में दर्शा दिया तालाब?

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पदमेश न्यूज़, बालाघाट। जनपद पंचायत बालाघाट के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत टेकाड़ी में कुछ शासकीय काम ऐसे किए गए हैं जो धरातल पर तो नजर नहीं आ रहे हैं।लेकिन शासन से स्वीकृत वह कार्य सरकारी कागजों में या तो बनकर पूर्ण हो चुके हैं या फिर उनका निर्माण कार्य अंतिम चरण में चल रहा है। यह बात हम नहीं कह रहे हैं बल्कि ऐसा आरोप ग्राम पंचायत टेकाड़ी के हितग्राही, उप सरपंच, पंचगण और अन्य ग्रामीणों द्वारा आए दिनों लगाया जा रहा है। अब ग्राम पंचायत टेकाड़ी में एक ऐसा मामला सामने आया है जहां शासन की योजना के तहत हितग्राही के खेत से मिट्टी तक नहीं खोदी गई है और सरकारी कागजों में वहां तालाब का निर्माण होना बताया गया है। जहां पंचायत द्वारा न केवल तालाब का निर्माण कार्य करना बताया गया है, बल्कि उस निर्माण कार्य की कुछ राशि भी निकाल ली गई है। जिस पर हितग्राही, उप सरपंच और अन्य ग्रामीणों ने आपत्ति जताते हुए मामले की वैधानिक जांच किए जाने की गुहार लगाई है

कागजो में दिखा दिया तालाब निमार्ण का कार्य, निकाली राशि
पर्यटन ग्राम टेकाड़ी पंचायत में अनियमित्ता व कार्य मे गड़बड़ी के लगातार आरोप लग रहे है।जहा बिना काम किए ही कागजो में कार्य दर्शाकर, फर्जी बिल बाउचर के आधार पर शासकीय राशि का गबन किए जाने का आरोप हितग्राही के साथ साथ, स्थानीय ग्रामीणों ने भी लगाया है।पूरा मामला शासन के जल गंगा संवर्धन अभियान से बनाए गए खेत तालाब से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार गांव की हितग्राही हिरवंती संतोष नागेश्वर के नाम से खेत तालाब स्वीकृत किया गया। जिम्मेदारों ने कागजों में तालाब निर्माण दर्शा कर राशि आहरित ली।शिकायत पर जांच करने जिम्मेदार पहुंचे, लेकिन कार्रवाई के नाम जुर्माना लगाकर कार्रवाई को ही ठंडा बस्ती में डाल दिया जिस पर आपत्ति जलप्रपात आते हुए हितग्राही सहित अन्य ग्रामीणों ने मामले की वरिष्ठ स्तर से जांच किए जाने की मांगती है तो वहीं उन्होंने मामले में इंसाफ न मिलने पर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की चेतावनी दी है।

खेत मे उगी है झाड़ियां,कागजो में बन रहे तालाब की निकाल ली 74,646 रु की राशि
शिकायकर्ता संतोष नागेश्वर और गुलाबचंद पटले के अनुसार,हितग्राही हिरवंती नागेश्वर ग्राम पंचायत टेकाड़ी के वार्ड नंबर 05 की निवासी है। 10 मई 2025 को हिरवंती के नाम से जल गंगा संवर्धन खेत तालाब स्वीकृत हुआ था। 01 लाख 37 हजार 203 रुपए की राशि से हिरवंती के खेत की खसरा नंबर 12/6 भूमि पर तालाब निर्माण किया जाना था। पंचायत के जिम्मेदारों ने कागजों में तालाब निर्माण करवाकर मनरेगा के करीब 74,646 रुपए की राशि आहरित कर ली गई। वर्तमान समय तक उनकी जमींन पर न तो खेत तालाब बना है न किसी तरह का कार्य किया गया है। यहां तक की जिस जगह पर तालाब दर्शाया गया है उस जगह पर छोटी बड़ी झाड़ियां वर्तमान समय मे उगी हुई है।जिसपर आपत्ति जताते हुए हितग्राही सहित अन्य ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर वैधानिक कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

अधिकारियों की जांच पर भी उठ रहे सवाल
ग्रामीणों ने बताया कि मामले की जानकारी उन्हें तब लगी जब तालाब निर्माण में कार्य करने के नाम पर मजदूरों के नाम से फर्जी मस्टरोल तैयार कर राशि आहरित की गई। पूरे मामले की उन्होंने जनपद सीईओ से शिकायत कर जांच की मांग की।लेकिन लंबे समय तक मामले की जांच नही हुई।फिर कई बार मामले की शिकायत करने पर जनपद स्तर से जांच दल गठित किया गया। जांच अधिकारी मौके पर जांच करने पहुंचे लेकिन वास्तविक जांच न करते हुए मौके पर 20 बाई 20 लंबाई, चौड़ाई और 15 फीट की गहराई का तालाब निर्माण किया जाना दर्शा दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार जिस जगह पर जांच अधिकारियों द्वारा नापझौक करके तालाब का काम होना बताता गया है वहां तालाब निर्माण के नाम पर एक इंच मिट्टी तक नहीं खोदी गई है। यहां तक की वहां झाड़ियां उगी हुई है। इस पर ग्रामीणों ने जांच अधिकारियों पर भी सवाल उठाते हुए,मिली भगत की बात कही है।

जांच के बाद 4 लोगो पर लगे जुर्माने पर उठाए सवाल
बताया गया गई इस मामले की पुनः शिकायत पर जब जांच दल निरीक्षण पर आया तो जनपद स्तर से चार लोगों (सरपंच सचिव सहित अन्य) पर 10-10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। जिसपर भी ग्रामीणों द्वारा सवाल उठाए गए है।

जांच टीम ने बनाई झूठी रिपोर्ट
डॉ पटले व नागेश्वर, सहित अन्य ने बताया कि हितग्राही हिरवंती ने अपनी जमींन पर पूर्व में फसल लगाई थी। वर्तमान में उनकी जमींन समतल खाली है, जिसे देखकर ही स्पष्ट समझा जा सकता है कि मौके पर किसी प्रकार का कार्य नहीं किया गया है। बावजूद इसके जांच टीम ने झूठी जांच रिपोर्ट बनाई। इस मामले में पुन: उन्होंने शिकायत कर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग करते हुए, दोषियों पर कार्यवाही और उन्हें न्याय दिलाने की गुहार लगाई है।

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