केरल सरकार का स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रति व्यक्ति खर्च देश के सभी राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा 9,871 रुपए है। यह हेल्थ पर राष्ट्रीय खर्च के औसत 2,100 रुपए का लगभग 4 गुना है। इससे साफ होता है कि केरल राज्य में हेल्थ केयर पर होने वाला खर्च दूसरे राज्यों की तुलना में बहुत ज्यादा है।
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की नेशनल हेल्थ एकाउंट की 2018-19 की अनुमान रिपोर्ट में हिमाचल प्रदेश को हेल्थ पर खर्च (6,946 रुपये) में दूसरे स्थान पर रखा गया है। केरल के हेल्थ पर खर्च के आंकड़े दूसरे दक्षिण भारतीय राज्यों की तुलना में दोगुने थे। हेल्थ पर कर्नाटक में 4,878 रुपए, तमिलनाडु में 4,311 रुपए, तेलंगाना में 4,130 रुपए और आंध्र प्रदेश में 4,967 रुपये खर्च किए गए। इसके अलावा केरल में हेल्थ पर खर्च पिछले साल 2017-18 के 9,264 रुपए से बढ़ भी गया है।
एनएचए की ये लगातार छठी अनुमान रिपोर्ट है। ये रिपोर्ट डब्ल्यूएचओ द्वारा विकसित स्वास्थ्य लेखा प्रणाली, 2011 के अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत मानक के आधार पर एक लेखा ढांचे का उपयोग करके तैयार की गई है। रिपोर्ट से पता चलता है कि केरल में लोगों की जेब से भी हेल्थ पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है। हेल्थ पर खर्च का दो-तिहाई या 69 फीसदी निजी बचत या उधार या अन्य स्रोतों से दिया जा रहा है, जबकि इसका राष्ट्रीय औसत 53 फीसदी है।
डेटा दिखाता है कि केरल में स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए लोग अन्य दक्षिणी राज्यों की तुलना में 2.5 गुना अधिक भुगतान कर रहे हैं। दूसरी ओर केरल अपने सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 1.1 फीसदी हेल्थ पर खर्च कर रहा है, जो अन्य दक्षिणी राज्यों की तुलना में मामूली रूप से ज्यादा है। यह संकेत करता है कि राज्य सरकार विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के तहत स्वास्थ्य उत्पादों और सेवाओं के लिए ज्यादा खर्च कर रही है।










































