१ करोड़ ९ लाख की स्वीकृति के बाद भी भद्रीटोला बलीपाट टोला रसातल में

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वारासिवनी जनपद पंचायत  अंतर्गत ग्राम पंचायत मंगेझरी अंतर्गत ग्राम मंगेझरी से भद्रीटोला ,बलीपाट टोला करीब २ किलोमीटर मार्ग का निर्माण अधूरा पड़ा हुआ है। जिसको वर्ष २०२१ में स्वीकृति दी गयी थी करीब ४ वर्ष होते आ गए हैं परंतु उस मार्ग को लोक निर्माण विभाग के द्वारा वर्तमान तक पूरा नहीं करवाया गया है। जिसके कारण ग्रामीणों को आज भी मार्ग पर कीचड़ गड्ढे पानी जमा होने या कीचड़ के दलदल जैसी समस्या से परेशान होना पड़ रहा है। जहां पर कुछ स्थानों पर तो पैदल चलने लायक भी स्थिति नहीं बची हुई है जबकि विभाग के द्वारा यह २ किलोमीटर करीब मार्ग कि स्वीकृति ११ जनवरी २०२१ को की गई थी और जहां पर कार्य भी प्रारंभ हो गया था परंतु वह आज तक पूरा नहीं हो पाया है। जबकि कार्य पूर्ण होने की तारीख भी निकल चुकी है यह मार्ग करीब १करोड़ ९ लाख रुपये की लागत से बनाया जाना था । परंतु इसका आज तक पूर्ण नहीं होना समझ से परे दिख रहा है। जिसको लेकर ग्रामीण आक्रोशित हैं जिनके द्वारा मार्ग का पूर्ण निर्माण करने की मांग की जा रही है।

यह मार्ग की स्थिति

ग्राम पंचायत मंगेझरी के सोसायटी चौक से २०० मीटर की दूरी पर ग्राम का पक्का मार्ग समाप्त हो जाता है। जिसके बाद कच्चा मार्ग बना हुआ है जहां नहर के ऊपर पुलिया बनाया गया है जो पूरा कच्चा मार्ग भद्रीटोला ,बलीपाट टोला तक है । यह कच्चा मार्ग किसी के द्वारा बनाया नहीं गया है नहर के ऊपर चलने की यह बहुत पुरानी पगडंडी है। जिसके माध्यम से भद्रीटोला ,बलीपाट टोला ,जयराम टोला में निवासरत लोग प्रतिदिन ग्राम पंचायत या वारासिवनी आने के लिए इसी मार्ग का उपयोग करते हैं। इसके अलावा उनके पास कोई दूसरा साधन नहीं है । ऐसे में बड़ी संख्या में रोजाना इन ग्राम के बालक बालिकाएं शिक्षा अध्ययन करने के लिए ग्राम के माध्यमिक स्कूल या अन्य हाई स्कूल हायर सेकेंडरी स्कूल महाविद्यालय जैसे संस्थानों में आना जाना करते हैं। जहां पर बरसात के दौरान मार्ग पर बड़े बड़े गड्ढे और दलदल जैसी स्थिति कुछ स्थानों पर बनी हुई है।  जहां से पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा है परंतु मजबूरी में ग्रामीणों को उक्त मार्ग का उपयोग करना पड़ रहा है। ऐसे में मार्ग पर फि सलन होने से दुर्घटनाग्रस्त होकर नहर में भी गिरने की संभावना बनी हुई है जबकि नहर अभी भरकर जा रहा है ,जिसको लेकर अनेकों बार ग्रामीणों के द्वारा शासन प्रशासन से मांग की गई है। परंतु वर्तमान तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी के द्वारा उक्त अधूरे निर्माण पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया है । जिसका कारण है कि आज भी ग्रामीणों को विभाग की लापरवाही का दंश भुगतना पड़ रहा है और उनके ग्राम आज भी रसातल में पड़े हुए हैं।

छात्र.छात्राओं के आंदोलन के बाद हुआ था मार्ग स्वीकृत

भद्रीटोला ,बलीपाट टोला ,जयराम टोला से नगर मुख्यालय या विभिन्न विद्यालयों में आने वाले छात्र छात्राओं के द्वारा मार्ग की समस्या से परेशान होकर ग्रामीणों के साथ वर्ष २०१९-२० में शासन को अनेकों बार ज्ञापन देने पर भी कोई बात नही बनने पर छात्र छात्राओं के द्वारा अपने ग्राम किनारे अनसन पर बैठ गए थे। जहां पर अधिकारी कर्मचारी सहित जनप्रतिनिधियों के द्वारा उपस्थित होकर छात्र छात्राओं की समस्या पर निष्कर्ष निकालने को लेकर आश्वासन दिया गया था। ६ महीने के अंदर मार्ग निर्माण की बात भी अधिकारियों के द्वारा कही गई थी इसके बाद जिला प्रशासन के द्वारा सडक़ की स्वीकृति दी गई परंतु वह कार्य आज भी अधूरा पड़ा हुआ है। जिसे पूर्ण करने पर कोई जिम्मेदार अधिकारी ध्यान नहीं दे रहा है । जिसमें छात्र छात्राओं को आज भी समस्याओं से संभालते हुए आवागमन करना पड़ रहा है। भले समय बदल गया पर मार्ग की व्यवस्था आज भी नहीं बदल पाई है।

स्वीकृति १ करोड़ ९ लाख की कार्य ३१ लाख का

छात्र छात्रायें एवं ग्रामीणों के आंदोलन के बाद मार्ग की स्वीकृति दी गई थी जिसके अधूरे निर्माण पर बोर्ड लगा दिया गया है। जिसमें जानकारी इस प्रकार है कि यह सडक़ प्रधानमंत्री खनिज कल्याण कार्यक्रम अंतर्गत मंगेझरी से भद्रीटोला ,बलिपाट टोला रोड़ निर्माण कार्य लंबाई करीब १.७५ किमी सडक़ की स्वीकृति मिली है। जिसकी प्रशासकीय स्वीकृति ११ जनवरी २०२१ को लागत करीब १ करोड़ ९ लाख रुपये की दी गयी थी। जिसका कार्य प्रारंभ २ अप्रैल २०२१ को किया गया और २८ जून २०२२ को कार्य पूर्ण किया। जिसमें किये कार्य की मुल्याकिंत राशि ३१०२८०७ रुपये बताई गई जिसकी क्रियान्वयन एजेंसी लोक निर्माण विभाग संभाग क्रमांक १ बालाघाट थी।

विधायक प्रदीप जायसवाल के फंड से दी थी एक करोड़ ९ लाख की स्वीकृति-मुन्नालाल उइके

ग्रामीण मुन्नालाल उइके ने बताया कि यह सडक़ में समस्या बहुत है पैदल चलना दुर्भर हो गया है क्योंकि गड्ढे एवं पूरा रोड़ कीचड़ से सराबोर हो गया है। इसमें विधायक प्रदीप जायसवाल के फंड से राशि दी थी एक करोड़ करीब की स्वीकृति मिली थी। इसमें यह रोड़ नहीं बनी जबकि गांव के अंदर सीसी सडक़ बनाई गई उसके साइड को भी नहीं भरा गया है और पूरा पैसा निकाल लिया गया। यहां पर ड़हरवाल ठेकेदार थे तो उसने डामर की जगह सीसी सडक़ बनाने की बात हमसे बोला था हमें तो रोड़ चाहिए था आने जाने के लिए तो हम हर चीज में राजी थे। पर वह भी नहीं बना पाए जबकि हमारे तीन टोले है जहां आवागमन के साधन से दूर आज भी रसातल में पड़े हुए हैं।

स्कुली बच्चों ने इस रोड़ के लिये किया था आंदोलन-अनुरसिंह उइके

ग्रामीण अनुरसिंह उइके ने बताया कि १ करोड़ ९ लाख की रोड़ स्वीकृत की गई थी जिसमें ३००मीटर रोड बनी है । नहर की रोड़ आज भी यथावत पड़ी हुई है और यहां पर आवागमन की भारी दिक्कत है। इसके लिए स्कूल के बच्चों ने अनशन भी किया था आंदोलन में भी बैठे थे। उसे समय मंत्री एसडीएम प्रशासन ने यहां पर आकर आश्वासन दिया था। अधिकारियों ने ६ महीने में सडक़ बनाने की बात कही थी। तत्कालीन एसडीएम संदीप सिंह थे जिन्होंने बुलाया था तो हम ८ लोग तहसील कार्यालय में गए तो उन्होंने पूरी बात की थी। परंतु टोले की रोड़ बनाएं जिसमें भी आज बहुत समस्या है और हमारा सरपंच जो है वह इन समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है । हमारा गांव अच्छे व्यक्ति को नहीं चुनता है वरना पंचायत भी ५० ट्राली मुरम डालकर इस रोड़ को अच्छा कर सकती थी। उस समय काम चालू हुआ फिर जो बंद हुआ तो फि र दोबारा चालू नहीं हुआ।

रोड़  खराब होने से  आवागमन में दिक्कत है-महेश बिसेन

ग्रामीण महेश बिसेन ने बताया कि हमारा रोड़ बहुत ज्यादा खराब है आवागमन में दिक्कत है मोटरसाइकिल और साइकिल से तो आप चल नहीं सकते गिर जाते हैं। परसों हमारे ग्राम में एक प्राथमिक स्कूल है वहां के शिक्षक स्कूल आ रहे थे तो कीचड़ में फ ंसकर गिर गए कपड़े जो खराब हुई परंतु गंभीर चोट भी आ गई फि र उन्हें हमारे द्वारा उठाकर अस्पताल पहुंचाया गया। यहां पर तीन टोले है जहां पर सभी घर में पढऩे लिखने वाले बच्चे हैं जो माध्यमिक स्कूल, हाई स्कूल, हायर सेकेंडरी स्कूल या महाविद्यालय में शिक्षा अध्ययन करने के लिए इसी मार्ग से आना जाना करते हैं। जिन्हें आते जाते बहुत समस्या होती है करीब १ किलोमीटर से भी अधिक का यह मार्ग पड़ता है इसमें ५०० मीटर से अधिक रोड़ खराब है । जहां पर चलना भी दुर्भर हो गया है यह रोड़ बनना बहुत जरूरी है ताकि हमारे को वर्षों से हो रही दिक्कत से निजात मिल सके नहर में बच्चों के गिरने का डर लगा रहता है।

मार्ग नही बनने से नहर में गिरने से दो लोगो की मौत हो चुकी है-ज्ञानसिंह वल्के

ग्रामीण ज्ञानसिंह वल्के ने बताया कि हमारे यहां भद्रीटोला ,बलीपाट टोला ऐसे तीन टोले है जिसमें बलीपाट टोले में प्राथमिक स्कूल है । जहां तीनों टोल के छोटे छोटे नौनिहाल बच्चों जाते हैं। इस दौरान केवल बद्रीटोला में ही सीसी सडक़ है उसके बाद बाकी कहीं सडक़ नहीं है ऐसे में कीचड़ से बच्चे कैसे जाएं और नहर किनारे चलना है बहुत ज्यादा दिक्कत है। यह ऑटो या कोई वाहन अंदर नहीं आ पाता है १०८ को भी बुलाते हैं तो वह भी अंदर नहीं आ पाती है कई बार मरीज को यथाशक्ति और यथा व्यवस्था उठाकर ले जाना होता है। वह सब मंगेझरी के अंतिम सीमेंट रोड़़ पर खड़े रहते हैं इस प्रकार की स्थिति यहां पर बनी हुई है। नहर में गिरने से पहले दो लडक़ों की मौत हो चुकी है हमारे घरों से कोई भी व्यक्ति बाहर जाता है तो उसके आते तक हमें डर लगा रहता है हम यही चाहते हैं कि यह रोड़ बनना चाहिए।

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