डॉक्टर भीमराव अंबेडकर मंगल भवन में 4 जून को दी बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया भारतीय बौद्ध महासभा के तत्वाधान में आयोजित जिला स्तरीय विशाल बौद्ध महासम्मेलन एवं 10 दिवसीय श्रामनेर बौद्धचार्य उपासीका धम्म प्रशिक्षण शिविर का समापन समारोह पूर्वक किया गया। यह कार्यक्रम दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जगदीश गवई के मुख्य आतिथ्य एवं राष्ट्रीय सचिव बीएच गायकवाड, राष्ट्रीय संगठके गौतम पाटिल, प्रदेश अध्यक्ष चरणदास ढेंगरे, प्रदेश सचिव आर के कठाने जिला अध्यक्ष एसएल रंगारे के विशेष आतिथ्य व आरडी बंसोड़ की अध्यक्षता में कार्यक्रम का प्रारंभ किया गया। जिसमें सर्वप्रथम तथागत गौतम बुद्ध डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर माल्यार्पण किया गया। तत्पश्चात उपस्थित जनों के द्वारा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाज को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया के पदाधिकारी सदस्य सहित गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जगदीश गवई ने पद्मेश से चर्चा में बताया कि डॉक्टर बी आर अंबेडकर के द्वारा स्थापित यह एकमात्र धार्मिक संस्था है। श्रामनेर शिविर लगाया गया था इसके माध्यम से डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जैसा परिवर्तन लोगों में लाना चाहते थे वही कार्य किया गया। बौद्ध धर्म मानवता सिखाता है इसमें वर्ण लिंग का भेद नहीं है यदि समान समाज की व्यवस्था कहीं है तो बौद्ध धर्म में है जो सभी को एक साथ लेकर चलता है। यह धर्म ही है जो लोगों को अपना जीवन कैसे सुखी बनाएं यह बताता है।
आरडी बंसोड़ ने बताया कि 10 दिवसीय श्रामनेर शिविर का आयोजन किया गया था जिसमें मुंबई से पहुंचे प्रशिक्षक पूज्य भदंत विशुद्धि बोधि एवं भुसावल से पहुंचे केवाय सुरवाड़े के मार्गदर्शन में तक्षशिला वाचनालय में शिविर लगाया गया। इसका उद्देश्य धर्म का प्रचार प्रसार करना है और लोगों को जीवन जीने की कला सिखाना कि किस प्रकार से वह अपने जीवन में ब्रह्मचर्य का पालन करें 8 शीलो को अपने नियंत्रण में रखें इसका ज्ञान दिया गया है। वह इस ज्ञान का जरूर पालन करेंगे अब वह आगे चाहे तो भंते बने या ना बने पर जिम्मेदार नागरिक जरूर बनेगे।







































