शासन द्वारा किसानों को सुविधा प्रदान करने नहरो की मरम्मत सहित अन्य कार्य के लिए समय-समय पर आबंटन जारी किया जाता है लेकिन विभागीय अधिकारियों द्वारा मेंटेनेंस कार्य के लिए ध्यान नहीं दिए जाने के कारण उसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है। ऐसा ही एक मामला नगर मुख्यालय से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम गढ़दा में सामने आया, जहां तालाब का गेट बंद नहीं होने से उससे बहने वाले पानी के कारण किसानों की धान की फसल बर्बाद हो रही है।
धान की फसल कुछेक किसानों की ही नहीं बल्कि करीब 100 एकड़ जमीन में लगी फसल खराब हो रही है। ग्राम पंचायत गढ़दा और परासपानी के किसानों की यह फसल है जो पूरी तरह पक चुकी है और काटने की स्थिति में है, लेकिन खेत में पानी भरा होने की वजह से किसान फसल को काट नहीं पा रहे है जिससे किसानों में आक्रोश व्याप्त हो गया है।
आपको बताये कि किसानों द्वारा इसकी सूचना संबंधित सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दी गई जिस पर जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी तो मौके पर नहीं पहुंचे लेकिन दीपावली जैसे त्यौहार में किसानों की समस्या को देखते हुए टाइम कीपर को पहुंचना पड़ा। जिस प्रकार से किसानों में आक्रोश देखा जा रहा था उसको देखते हुए टाइम कीपर द्वारा संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर इसका कार्य करने वाले मैकेनिक को बुलाया गया लेकिन गेट टूटा होने की वजह से गेट बंद ही नहीं हो पा रहा है।
तालाब के पास पहुंचे किसानों ने बताया कि जबसे यह तालाब बना है तब से गेट का मेंटेनेंस कार्य विभाग द्वारा नहीं कराया गया। यही कारण है कि गेट में जंग लग गया और उसकी वजह से गेट टूट गया है, नाला किनारे जितने भी खेत है उसमें पानी जाने से धान की फसल खराब हो गई है। अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया लेकिन किसानों के सामने जो समस्या खड़ी है उसका समाधान नहीं किया गया, जिसके कारण किसानों की धान खराब हो रही है।










































