श्रीलंका में आर्थिक संकट को लेकर सरकार विरोधी अभूतपूर्व प्रदर्शन 123 दिनों के बाद औपचारिक रूप से खत्म हुए। इन प्रदर्शनों के कारण राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को सत्ता गंवानी पड़ी थी। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने कहा कि ”व्यवस्था में बदलाव’ के लिए उनका अभियान जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी प्रदर्शनों का केंद्र रहे गॉल फेस इलाके को खाली कर दिया है, जहां वे नौ अप्रैल से डेरा डालकर बैठे थे। प्रदर्शनकारियों के समूह के प्रवक्ता मनोज ननयक्कारा ने कहा, हमने सामूहिक रूप से गॉल फेस इलाके को खाली करने का फैसला लिया है। इसका यह मतलब नहीं है कि हमारा संघर्ष खत्म हो गया है।”
युवा बौद्ध भिक्षु ने कहा, हम आपातकाल हटाने, नए सिरे से संसदीय चुनाव कराने और राष्ट्रपति के द्वारा शासन की प्रणाली को खत्म करने के लिए जोर देते रहने वाले हैं। एक और प्रदर्शनकारी ने कहा,व्यवस्था में बदलाव के लिए हमारा अभियान जारी रहेगा। हालांकि हमने यहां स्थल पर अभियान खत्म कर दिया है।’पूर्व प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को राष्ट्रपति चुने जाने के बाद प्रदर्शनकारियों पर प्रदर्शन स्थल खाली करने का दबाव था। विक्रमसिंघे ने सेना और पुलिस को प्रदर्शन स्थल खाली कराने और राष्ट्रपति भवन व अन्य सरकारी इमारतों में घुसने वालों की पहचान करने का निर्देश दिया था।










































