बालाघाट अपर सत्र न्यायाधीश भू-भास्कर की बैहर की अदालत ने शासन की योजना के अनुरूप ग्राम पंचायत के निर्माण कार्य कराए बिना 19 लाख रुपएआहरण करके गबन करने के मामले में सरपंच सुखचंद उर्फ सुकचंद मरकाम पिता मनोहर मरकाम ग्राम सिजोरा थाना गढ़ी निवासी को 10 वर्ष की कठोर कारावास 75हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किए। यह मामला 11 फरवरी 2010 से 21 फरवरी 2015 के मध्य का है। जब इस पंचायत मैं सरपंच पद के पद पर सुखचंद मरकाम और सचिव के पद पर सुकलाल पंद्रे पदस्थ था जिसका विद्वान अदालत में इस प्रकरण के चलते निधन हो चुका है।
अभियोजन अभियोजन के अनुसार 11 फरवरी 2010 से 21 फरवरी 2015 तक ग्राम पंचायत सिहोरा के सरपंच के पद पर आरोपी सुखचंद तथा सचिव के पद पर आरोपी सुकलाल पदस्थ थे ।ग्राम पंचायत सिजोरा के नाम पर सेंट्रल बैंक बैहर में बचत खाता खोला गया था जिसका संचालन सचिव एवं सरपंच के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाता था । वित्तीय वर्ष 2013-14 में शासन द्वारा ग्राम पंचायत को पंच परमेश्वर मंद में 791621 रुपए प्रदान कर पंचायत के खाते में जमा किया गया था। इस कार्य के लिए तकनीकी व प्रशासकीय स्वीकृति जारी नहीं हुई थी। कार्य प्रारंभ करने के पूर्व ही 791621 रुपए का आहरण कर लिया गया। किंतु कोई काम नहीं किया गया। आईएपी योजना अंतर्गत सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 11,12 000 हजार रुपए पंचायत के खाते में जमा किया गया था। इस संपूर्ण राशि का आहरण कर लिया गया। किंतु मात्र 642119 रुपए खर्च करके स्लैब स्तर का काम किया गया ।शेष राशि 469881 रुपए का गबन कर दिया गया। बीआरजीएफ योजना के अंतर्गत आंगनबाड़ी निर्माण हेतु वर्ष 2011-12 में 500000रूपये आवंटित किया गया था। जिसमें से केवल 86053 रूपये का काम किया गया शेष 4,13,947 रुपए का गबन कर दिया गया। निर्मल भारत अभियान के अंतर्गत 50 घरों में शौचालय बनाने के लिए 2,30000रूपये आवटित किया गया था। किंतु सरपंच सचिव ने संपूर्ण पैसे को आहरित कर लिए और एक भी शौचालय नहीं बनवाया। सरपंच सुखचंद और सचिव सुकलाल दोनों के द्वारा कार्य किए बगैर 19 लाख 4 हजार 621रूपये ज्यादा आहरण कर लिए। तब सीईओ जनपद पंचायत बैहर द्वारा 5 अगस्त 2014 को सचिव और सरपंच को नोटिस जारी कर कार्य शीघ्र पूर्ण करने हेतु कहा गया था। परंतु उन्होंने कार्य पूरा नहीं किए धारा 92 पंचायत राज अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई करने हेतु जिला पंचायत बालाघाट को पत्र लिखा गया था जिला पंचायत बालाघाट द्वारा अपराधिक प्रकरण दर्ज कराने हेतु निर्देश दिया गया था तब अरुण कुमार सीईओ जनपद पंचायत की सूचना पर थाना गढ़ी में प्रथम सूचना रिपोर्ट 94 / 2014 दर्ज किया गया था और इन आरोपियों के विरुद्ध धारा 409 420 468 471 34 भादवि के तहत अपराध दर्ज कर अभियोग पत्र विद्वान अदालत में पेश किया गया था। यह मामला अपर सत्र न्यायाधीश भू भास्कर यादव की अदालत में चला जहां पर अभियोजन पक्ष आरोपी सरपंच सुखचंद पूर्व सूकचंद मरकाम के विरुद्ध आरोपित अपराध सिद्ध करने में सफल रहा। जिसके परिणाम स्वरूप विद्वान अदालत ने मामले की समस्त परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी सूखचंद उर्फ सूकचंद मरकाम ग्राम सिजोरा थाना गढ़ी निवासी को धारा 409 भाग भादवि के आरोप में 10 वर्ष की कठोर कारावास एवं 50000 रूपये अर्थदंड से दंडित किए, धारा 467 भादवि के तहत अपराध में 10 वर्ष की कठोर कारावास और 25000 रूपये अर्थदंड, धारा 420 भादवी के तहत अपराध के आरोप में 5 वर्ष की कठोर कारावास और 25000 रूपये अर्थदंड से दंडित किए। ज्ञात हो कि इस मामले के विद्वान अदालत में चलते सचिव सुकलाल पंद्रे की मौत हो चुकी है ।इस मामले में शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक अशोक कुमार वाट ने पैरवी की थी।










































